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सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) विश्व की प्राचीनतम शहरी सभ्यताओं (Ancient Urban Civilizations) में से एक है, जो अपनी उत्कृष्ट नगर नियोजन प्रणाली के लिए जानी जाती है। यहाँ के नगरों को ग्रिड पद्धति (Grid System) पर बसाया गया था, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण (Right Angle) पर काटती थीं। हड़प्पा (Harappa) और मोहनजोदड़ो (Mohenjo-daro) जैसे प्रमुख शहरों में पक्की ईंटों (Baked Bricks) के बने बहुमंजिला मकान मिलते थे। पटवारी परीक्षा (Patwari Exam) में अक्सर इस सभ्यता के जल निकास तंत्र (Drainage System) के बारे में पूछा जाता है, जो उस समय की इंजीनियरिंग (Engineering) का बेजोड़ नमूना था।

इस सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि (Agriculture) और व्यापार (Trade) था, जिसके प्रमाण लोथल (Lothal) जैसे बंदरगाह (Dockyard) से मिलते हैं। यहाँ के निवासी कपास (Cotton) उगाने वाले विश्व के पहले लोग थे और वे कांस्य (Bronze) का उपयोग करना जानते थे। खुदाई में मिली मुहरों (Seals) पर पशुपति शिव और मातृदेवी (Mother Goddess) की आकृतियां उनकी धार्मिक मान्यताओं (Religious Beliefs) को दर्शाती हैं। रेलवे भर्ती (Railway Exam) में इस काल की मूर्तिकला और लिपि (Script) से जुड़े प्रश्न काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

नगरों को दो भागों में विभाजित किया गया था, जिसमें एक ऊँचा किला (Citadel) और एक निचला शहर (Lower Town) होता था। किले वाले भाग में सार्वजनिक भवन (Public Buildings) जैसे विशाल अन्नागार (Granary) और स्नानागार (Great Bath) स्थित थे। यह सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) और कुशल प्रशासन (Efficient Administration) का संकेत देता है। सेना भर्ती (Army Bharti) की लिखित परीक्षा में अक्सर इन पुरातात्विक स्थलों (Archaeological Sites) की खोज करने वाले वैज्ञानिकों के नाम पूछे जाते हैं।

व्यापारिक संबंधों की बात करें तो सिंधु निवासी मेसोपोटामिया (Mesopotamia) और फारस (Persia) के साथ समुद्री मार्गों (Sea Routes) से जुड़े थे। वे माप-तौल की दशमलव प्रणाली (Decimal System of Weights) का उपयोग करते थे, जो उनके गणितीय ज्ञान (Mathematical Knowledge) को सिद्ध करता है। डाक विभाग (Post Office Exam) जैसी परीक्षाओं के लिए इन बाटों और पैमानों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। मिट्टी के बर्तनों (Pottery) पर की गई चित्रकारी उनकी उन्नत कलात्मक रुचि (Artistic Taste) को प्रदर्शित करती है।

सिंधु सभ्यता का पतन (Decline) आज भी इतिहासकारों के बीच चर्चा का विषय है, जिसके पीछे बाढ़ (Flood), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) या बाहरी आक्रमण जैसे कारण बताए जाते हैं। आंगनवाड़ी (Anganwadi Exam) और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में इस सभ्यता के भौगोलिक विस्तार (Geographical Expansion) जैसे कालीबंगा और धोलावीरा की स्थिति पूछी जाती है। इस महान सभ्यता का अध्ययन हमें प्राचीन भारत की समृद्ध विरासत (Rich Heritage) को समझने में मदद करता है। निरंतर अभ्यास से आप इन ऐतिहासिक तथ्यों (Historical Facts) पर अच्छी पकड़ बना सकते हैं।

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सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) विश्व की प्राचीनतम शहरी सभ्यताओं (Ancient Urban Civilizations) में से एक है, जो अपनी उत्कृष्ट नगर नियोजन प्रणाली के लिए जानी जाती है। यहाँ के नगरों को ग्रिड पद्धति (Grid System) पर बसाया गया था, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण (Right Angle) पर काटती थीं। हड़प्पा (Harappa) और मोहनजोदड़ो (Mohenjo-daro) जैसे प्रमुख शहरों में पक्की ईंटों (Baked Bricks) के बने बहुमंजिला मकान मिलते थे। पटवारी परीक्षा (Patwari Exam) में अक्सर इस सभ्यता के जल निकास तंत्र (Drainage System) के बारे में पूछा जाता है, जो उस समय की इंजीनियरिंग (Engineering) का बेजोड़ नमूना था।

इस सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि (Agriculture) और व्यापार (Trade) था, जिसके प्रमाण लोथल (Lothal) जैसे बंदरगाह (Dockyard) से मिलते हैं। यहाँ के निवासी कपास (Cotton) उगाने वाले विश्व के पहले लोग थे और वे कांस्य (Bronze) का उपयोग करना जानते थे। खुदाई में मिली मुहरों (Seals) पर पशुपति शिव और मातृदेवी (Mother Goddess) की आकृतियां उनकी धार्मिक मान्यताओं (Religious Beliefs) को दर्शाती हैं। रेलवे भर्ती (Railway Exam) में इस काल की मूर्तिकला और लिपि (Script) से जुड़े प्रश्न काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

नगरों को दो भागों में विभाजित किया गया था, जिसमें एक ऊँचा किला (Citadel) और एक निचला शहर (Lower Town) होता था। किले वाले भाग में सार्वजनिक भवन (Public Buildings) जैसे विशाल अन्नागार (Granary) और स्नानागार (Great Bath) स्थित थे। यह सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) और कुशल प्रशासन (Efficient Administration) का संकेत देता है। सेना भर्ती (Army Bharti) की लिखित परीक्षा में अक्सर इन पुरातात्विक स्थलों (Archaeological Sites) की खोज करने वाले वैज्ञानिकों के नाम पूछे जाते हैं।

व्यापारिक संबंधों की बात करें तो सिंधु निवासी मेसोपोटामिया (Mesopotamia) और फारस (Persia) के साथ समुद्री मार्गों (Sea Routes) से जुड़े थे। वे माप-तौल की दशमलव प्रणाली (Decimal System of Weights) का उपयोग करते थे, जो उनके गणितीय ज्ञान (Mathematical Knowledge) को सिद्ध करता है। डाक विभाग (Post Office Exam) जैसी परीक्षाओं के लिए इन बाटों और पैमानों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। मिट्टी के बर्तनों (Pottery) पर की गई चित्रकारी उनकी उन्नत कलात्मक रुचि (Artistic Taste) को प्रदर्शित करती है।

सिंधु सभ्यता का पतन (Decline) आज भी इतिहासकारों के बीच चर्चा का विषय है, जिसके पीछे बाढ़ (Flood), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) या बाहरी आक्रमण जैसे कारण बताए जाते हैं। आंगनवाड़ी (Anganwadi Exam) और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में इस सभ्यता के भौगोलिक विस्तार (Geographical Expansion) जैसे कालीबंगा और धोलावीरा की स्थिति पूछी जाती है। इस महान सभ्यता का अध्ययन हमें प्राचीन भारत की समृद्ध विरासत (Rich Heritage) को समझने में मदद करता है। निरंतर अभ्यास से आप इन ऐतिहासिक तथ्यों (Historical Facts) पर अच्छी पकड़ बना सकते हैं।
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