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उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) भारत की न्याय व्यवस्था में शीर्ष पर स्थित है और यह संविधान का संरक्षक (Guardian of the Constitution) माना जाता है। अनुच्छेद 124 के तहत इसकी स्थापना का प्रावधान है और वर्तमान में इसमें एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और अन्य न्यायाधीश होते हैं। इसका क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) अत्यंत व्यापक है, जिसे प्रारंभिक, अपीलीय और परामर्शदात्री श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पटवारी परीक्षा (Patwari Exam) में अक्सर केंद्र-राज्य विवादों (Center-State Disputes) के निपटारे में न्यायालय की भूमिका पर प्रश्न आते हैं।

प्रारंभिक क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) के तहत उच्चतम न्यायालय सीधे उन मामलों की सुनवाई करता है जो भारत सरकार और राज्यों के बीच हों। अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction) के अंतर्गत यह दीवानी और फौजदारी (Civil and Criminal) मामलों में उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ अंतिम अपील सुनने वाली संस्था है। रेलवे (Railway Exam) और डाक विभाग (Post Office Exam) की परीक्षाओं के लिए अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को दी जाने वाली 'सलाहकारी शक्ति' (Advisory Power) के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। यह कानून की व्याख्या करने वाली अंतिम संस्था है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary) भारतीय लोकतंत्र की एक बुनियादी विशेषता है। इसका अर्थ है कि न्यायाधीश बिना किसी राजनीतिक दबाव या कार्यपालिका के हस्तक्षेप (Interference) के निडर होकर निर्णय ले सकें। न्यायाधीशों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली (Collegium System) और उनके वेतन का संचित निधि (Consolidated Fund) पर भारित होना इस स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। सेना भर्ती (Army Bharti) के उम्मीदवारों के लिए 'कोर्ट मार्शल' (Court Martial) और उसके विरुद्ध अपील के प्रावधानों की सामान्य जानकारी होना अच्छा है।

रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) के तहत अनुच्छेद 32 के माध्यम से उच्चतम न्यायालय मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पांच प्रकार की रिट (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश) जारी कर सकता है। न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) और जनहित याचिका (Public Interest Litigation - PIL) ने सामान्य नागरिकों के लिए न्याय के दरवाजे खोल दिए हैं। आंगनवाड़ी (Anganwadi Exam) और महिला कल्याण से जुड़े मामलों में न्यायालय के निर्देशों ने महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव (Social Change) लाए हैं। यह नागरिकों के अधिकारों का अंतिम प्रहरी (Sentinel) है।

उच्चतम न्यायालय 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) के रूप में भी कार्य करता है, जिसके फैसले पूरे देश की सभी अदालतों पर बाध्यकारी (Binding) होते हैं। न्यायपालिका की निष्पक्षता (Impartiality) ही आम जनता का कानून के शासन (Rule of Law) में विश्वास बनाए रखती है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक फैसलों (Landmark Judgments) जैसे केशवानंद भारती केस का अध्ययन करना अनिवार्य है। न्याय के सिद्धांतों और संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) को समझकर आप राजव्यवस्था के किसी भी कठिन प्रश्न को हल कर सकते हैं।

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उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) भारत की न्याय व्यवस्था में शीर्ष पर स्थित है और यह संविधान का संरक्षक (Guardian of the Constitution) माना जाता है। अनुच्छेद 124 के तहत इसकी स्थापना का प्रावधान है और वर्तमान में इसमें एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और अन्य न्यायाधीश होते हैं। इसका क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) अत्यंत व्यापक है, जिसे प्रारंभिक, अपीलीय और परामर्शदात्री श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पटवारी परीक्षा (Patwari Exam) में अक्सर केंद्र-राज्य विवादों (Center-State Disputes) के निपटारे में न्यायालय की भूमिका पर प्रश्न आते हैं।

प्रारंभिक क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) के तहत उच्चतम न्यायालय सीधे उन मामलों की सुनवाई करता है जो भारत सरकार और राज्यों के बीच हों। अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction) के अंतर्गत यह दीवानी और फौजदारी (Civil and Criminal) मामलों में उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ अंतिम अपील सुनने वाली संस्था है। रेलवे (Railway Exam) और डाक विभाग (Post Office Exam) की परीक्षाओं के लिए अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को दी जाने वाली 'सलाहकारी शक्ति' (Advisory Power) के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। यह कानून की व्याख्या करने वाली अंतिम संस्था है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary) भारतीय लोकतंत्र की एक बुनियादी विशेषता है। इसका अर्थ है कि न्यायाधीश बिना किसी राजनीतिक दबाव या कार्यपालिका के हस्तक्षेप (Interference) के निडर होकर निर्णय ले सकें। न्यायाधीशों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली (Collegium System) और उनके वेतन का संचित निधि (Consolidated Fund) पर भारित होना इस स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। सेना भर्ती (Army Bharti) के उम्मीदवारों के लिए 'कोर्ट मार्शल' (Court Martial) और उसके विरुद्ध अपील के प्रावधानों की सामान्य जानकारी होना अच्छा है।

रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) के तहत अनुच्छेद 32 के माध्यम से उच्चतम न्यायालय मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पांच प्रकार की रिट (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश) जारी कर सकता है। न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) और जनहित याचिका (Public Interest Litigation - PIL) ने सामान्य नागरिकों के लिए न्याय के दरवाजे खोल दिए हैं। आंगनवाड़ी (Anganwadi Exam) और महिला कल्याण से जुड़े मामलों में न्यायालय के निर्देशों ने महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव (Social Change) लाए हैं। यह नागरिकों के अधिकारों का अंतिम प्रहरी (Sentinel) है।

उच्चतम न्यायालय 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) के रूप में भी कार्य करता है, जिसके फैसले पूरे देश की सभी अदालतों पर बाध्यकारी (Binding) होते हैं। न्यायपालिका की निष्पक्षता (Impartiality) ही आम जनता का कानून के शासन (Rule of Law) में विश्वास बनाए रखती है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक फैसलों (Landmark Judgments) जैसे केशवानंद भारती केस का अध्ययन करना अनिवार्य है। न्याय के सिद्धांतों और संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) को समझकर आप राजव्यवस्था के किसी भी कठिन प्रश्न को हल कर सकते हैं।
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