एम्बेडेड सिस्टम (Embedded Systems) वास्तव में हार्डवेयर (Hardware) और सॉफ्टवेयर (Software) का एक मेल होता है, जिसे किसी विशेष कार्य को करने के लिए बनाया जाता है। इसके केंद्र में एक माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) या माइक्रोकंट्रोलर (Microcontroller) होता है, जो सिस्टम के मस्तिष्क (Brain) की तरह काम करता है। यह घटक इनपुट संकेतों (Input Signals) को प्रोसेस (Process) करता है और पूर्व-निर्धारित लॉजिक (Pre-defined Logic) के आधार पर परिणाम देता है। अरुडिनो (Arduino) और रास्पबेरी पाई (Raspberry Pi) इसके विकास के लिए उपयोग होने वाले प्रसिद्ध उत्पाद (Products) हैं।
मेमोरी (Memory) इस सिस्टम का एक अनिवार्य हिस्सा है, जहाँ प्रोग्राम कोड (Program Code) और डेटा (Data) को सुरक्षित रखा जाता है। इसमें आमतौर पर रीड-ओनली मेमोरी (ROM) का उपयोग सॉफ्टवेयर को स्थायी रूप से रखने के लिए और रैंडम एक्सेस मेमोरी (RAM) का उपयोग अस्थायी डेटा (Temporary Data) के प्रसंस्करण (Processing) के लिए किया जाता है। एम्बेडेड सिस्टम (Embedded Systems) में मेमोरी का आकार बहुत ही सीमित और अनुकूलित (Optimized) होता है ताकि बिजली की खपत (Power Consumption) कम रहे।
इनपुट और आउटपुट डिवाइसेस (Input and Output Devices) सिस्टम को बाहरी दुनिया से जोड़ते हैं। सेंसर (Sensors) जैसे तापमान सेंसर या गति सेंसर बाहरी वातावरण से जानकारी जुटाते हैं, जबकि एक्चुएटर्स (Actuators) या डिस्प्ले (Display) उस जानकारी पर प्रतिक्रिया देते हैं। उदाहरण के लिए, एक वॉशिंग मशीन (Washing Machine) में सेंसर पानी के स्तर को मापते हैं और माइक्रोकंट्रोलर (Microcontroller) मोटर को चलाने का निर्देश देता है। यह तालमेल ही मशीन को स्वचालित (Automatic) बनाता है।
एम्बेडेड सॉफ्टवेयर (Embedded Software) जिसे फर्मवेयर (Firmware) भी कहा जाता है, हार्डवेयर के भीतर लिखा गया प्रोग्राम होता है। इसे आमतौर पर सी (C) या सी++ (C++) जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं (Programming Languages) में लिखा जाता है क्योंकि ये भाषाएं हार्डवेयर के साथ सीधा संवाद करने में सक्षम होती हैं। यह सॉफ्टवेयर रीयल-टाइम (Real-time) में काम करता है, जिसका अर्थ है कि इसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर ही परिणाम देना होता है।
पावर सप्लाई (Power Supply) और संचार इंटरफेस (Communication Interfaces) सिस्टम की कार्यक्षमता को पूरा करते हैं। कई एम्बेडेड डिवाइस (Embedded Devices) बैटरी पर चलते हैं, इसलिए उनका बिजली प्रबंधन (Power Management) बहुत कुशल होना चाहिए। इसके अलावा, अन्य मशीनों से बात करने के लिए इनमें यूएआरटी (UART), एसपीआई (SPI) या आई2सी (I2C) जैसे प्रोटोकॉल (Protocols) का उपयोग किया जाता है। ये सभी घटक मिलकर एक छोटे लेकिन शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (Electronic System) का निर्माण करते हैं।