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वाहन की सुरक्षा के लिए आजकल बाजार में बहुत छोटे और स्मार्ट जीपीएस ट्रैकर्स (GPS Trackers) उपलब्ध हैं। इन डिवाइस को आप अपनी कार या बाइक के भीतर कहीं भी छुपाकर लगा सकते हैं। 'ऑनलेक' (Onelap) और 'अजीलो' (Ajelo) जैसे ब्रांड्स के ट्रैकिंग उत्पाद भारत में काफी मशहूर हैं। ये सीधे आपके स्मार्टफोन ऐप (Smartphone App) से जुड़े होते हैं और आपको हर पल की लोकेशन (Real-time Location) बताते रहते हैं। यदि आपकी गाड़ी आपकी अनुमति के बिना हिलती है, तो आपको तुरंत अलर्ट (Alert) मिल जाता है।

जीपीएस लॉक (GPS Lock) या 'इंजन इमोबिलाइज़र' (Engine Immobilizer) एक बहुत ही शक्तिशाली फीचर है। इसके जरिए आप दुनिया के किसी भी कोने से अपने फोन का बटन दबाकर अपनी कार या बाइक का इंजन (Engine) बंद कर सकते हैं। एक बार इंजन बंद होने के बाद, चोर उसे दोबारा चालू नहीं कर पाएगा जब तक कि आप ऐप से उसे अनलॉक (Unlock) न कर दें। यह तकनीक चोरी की वारदातों को रोकने में बहुत प्रभावी साबित हुई है और वाहन मालिकों को एक सुरक्षा का एहसास (Sense of Security) दिलाती है।

'जियो-फेंसिंग' (Geo-fencing) एक और कमाल की तकनीक है जो सुरक्षा को अगले स्तर पर ले जाती है। आप अपने घर या दफ्तर के आसपास एक वर्चुअल बाउंड्री (Virtual Boundary) बना सकते हैं। जैसे ही आपकी गाड़ी उस निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकलेगी, आपके फोन पर अलार्म (Alarm) बज जाएगा। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो अपनी गाड़ी ड्राइवर को देते हैं या अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। इससे गाड़ी के दुरुपयोग (Misuse) पर भी लगाम लगती है।

इन डिवाइस में 'रूट हिस्ट्री' (Route History) का विकल्प भी होता है, जहाँ आप पिछले 90 दिनों का पूरा सफ़र देख सकते हैं। आप जान सकते हैं कि आपकी गाड़ी किस दिन, कहाँ और कितनी गति (Speed) से चली थी। यह डेटा एक्सीडेंट (Accident) या किसी विवाद की स्थिति में बहुत काम आता है। अधिकांश जीपीएस ट्रैकर्स (GPS Trackers) में अपनी छोटी बैटरी (Internal Battery) भी होती है, इसलिए अगर चोर मुख्य बैटरी की तार काट भी दे, तब भी डिवाइस कुछ घंटों तक लोकेशन भेजता रहता है।

स्थापना (Installation) की बात करें तो ये डिवाइस बहुत ही आसानी से फिट हो जाते हैं और बहुत कम बिजली (Power) की खपत करते हैं। कुछ ट्रैकर्स तो सीधा ओबीडी पोर्ट (OBD Port) में लग जाते हैं, जिसके लिए किसी तार को काटने की जरूरत नहीं पड़ती। बीमा कंपनियां (Insurance Companies) भी उन वाहनों को प्राथमिकता देती हैं जिनमें सुरक्षा के लिए जीपीएस (GPS) लगा होता है। अपनी कीमती संपत्ति (Asset) की रक्षा के लिए एक अच्छा जीपीएस ट्रैकर (GPS Tracker) लगवाना एक बहुत ही समझदारी भरा निवेश है।

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वाहन की सुरक्षा के लिए आजकल बाजार में बहुत छोटे और स्मार्ट जीपीएस ट्रैकर्स (GPS Trackers) उपलब्ध हैं। इन डिवाइस को आप अपनी कार या बाइक के भीतर कहीं भी छुपाकर लगा सकते हैं। 'ऑनलेक' (Onelap) और 'अजीलो' (Ajelo) जैसे ब्रांड्स के ट्रैकिंग उत्पाद भारत में काफी मशहूर हैं। ये सीधे आपके स्मार्टफोन ऐप (Smartphone App) से जुड़े होते हैं और आपको हर पल की लोकेशन (Real-time Location) बताते रहते हैं। यदि आपकी गाड़ी आपकी अनुमति के बिना हिलती है, तो आपको तुरंत अलर्ट (Alert) मिल जाता है।

जीपीएस लॉक (GPS Lock) या 'इंजन इमोबिलाइज़र' (Engine Immobilizer) एक बहुत ही शक्तिशाली फीचर है। इसके जरिए आप दुनिया के किसी भी कोने से अपने फोन का बटन दबाकर अपनी कार या बाइक का इंजन (Engine) बंद कर सकते हैं। एक बार इंजन बंद होने के बाद, चोर उसे दोबारा चालू नहीं कर पाएगा जब तक कि आप ऐप से उसे अनलॉक (Unlock) न कर दें। यह तकनीक चोरी की वारदातों को रोकने में बहुत प्रभावी साबित हुई है और वाहन मालिकों को एक सुरक्षा का एहसास (Sense of Security) दिलाती है।

'जियो-फेंसिंग' (Geo-fencing) एक और कमाल की तकनीक है जो सुरक्षा को अगले स्तर पर ले जाती है। आप अपने घर या दफ्तर के आसपास एक वर्चुअल बाउंड्री (Virtual Boundary) बना सकते हैं। जैसे ही आपकी गाड़ी उस निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकलेगी, आपके फोन पर अलार्म (Alarm) बज जाएगा। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो अपनी गाड़ी ड्राइवर को देते हैं या अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। इससे गाड़ी के दुरुपयोग (Misuse) पर भी लगाम लगती है।

इन डिवाइस में 'रूट हिस्ट्री' (Route History) का विकल्प भी होता है, जहाँ आप पिछले 90 दिनों का पूरा सफ़र देख सकते हैं। आप जान सकते हैं कि आपकी गाड़ी किस दिन, कहाँ और कितनी गति (Speed) से चली थी। यह डेटा एक्सीडेंट (Accident) या किसी विवाद की स्थिति में बहुत काम आता है। अधिकांश जीपीएस ट्रैकर्स (GPS Trackers) में अपनी छोटी बैटरी (Internal Battery) भी होती है, इसलिए अगर चोर मुख्य बैटरी की तार काट भी दे, तब भी डिवाइस कुछ घंटों तक लोकेशन भेजता रहता है।

स्थापना (Installation) की बात करें तो ये डिवाइस बहुत ही आसानी से फिट हो जाते हैं और बहुत कम बिजली (Power) की खपत करते हैं। कुछ ट्रैकर्स तो सीधा ओबीडी पोर्ट (OBD Port) में लग जाते हैं, जिसके लिए किसी तार को काटने की जरूरत नहीं पड़ती। बीमा कंपनियां (Insurance Companies) भी उन वाहनों को प्राथमिकता देती हैं जिनमें सुरक्षा के लिए जीपीएस (GPS) लगा होता है। अपनी कीमती संपत्ति (Asset) की रक्षा के लिए एक अच्छा जीपीएस ट्रैकर (GPS Tracker) लगवाना एक बहुत ही समझदारी भरा निवेश है।
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