बड़े goals डराते हैं क्योंकि दिमाग पूरे result को एक साथ imagine कर लेता है। इसलिए सबसे पहले goal को finish line की तरह नहीं, एक journey की तरह देखें। जब आप सोचते हैं कि हर दिन बस थोड़ा सा काम करना है, तब mind relax रहता है और आपको goal भारी नहीं लगता। यह सोच goal को manageable बनाती है।
Goal को छोटे हिस्सों में अलग करने के लिए उसका पूरा process लिखिए। फिर देखें कि कौनसा हिस्सा पहले करना जरूरी है। इस mapping से आपको हर step साफ दिखाई देगा। जब step clear हो जाते हैं, तो action simple हो जाता है और motivation भी बढ़ता है। दिमाग uncertainty में ही घबराता है।
हर छोटे target को एक दिन या एक हफ्ते का नाम दें। ये time-boxing technique आपको मजबूती से track पर रखती है। जब time fix होता है, तब delay की आदत कम होती है। आपको हर दिन exact पता होगा कि क्या करना है और कितना करना है।
हर छोटे step के बाद खुद को छोटी सी खुशी दें। ये reward system brain को signal देता है कि मेहनत का फायदा मिल रहा है। Brain reward-driven होता है, इसलिए छोटे rewards discipline और consistency दोनों को मजबूत बनाते हैं। यह approach big goals को भी doable बना देती है।
अंत में, कभी भी पूरे goal की सोच मत कीजिए। बस आज के एक छोटे step पर ध्यान रखें। यही छोटे steps मिलकर बड़ा result बनाते हैं। Big goals हमेशा small actions का collection होते हैं।