उच्चारण सुधारने का प्राथमिक कदम व्यक्तिगत ध्वनियों (Individual Sounds) पर ध्यान देना है। अंग्रेजी भाषा में कई ऐसी ध्वनियाँ हैं जो भारतीय भाषाओं में नहीं पाई जातीं, जैसे 'th' या 'v' और 'w' के बीच का अंतर। यदि आप इन ध्वनियों का अभ्यास नहीं करते हैं, तो परीक्षक के लिए आपके शब्दों को समझना कठिन हो सकता है। स्पष्टता (Clarity) लाने के लिए आपको अपने होठों और जीभ की स्थिति (Position of Lips and Tongue) पर नियंत्रण पाना होगा।
ध्वनि के साथ-साथ अक्षरों पर जोर (Word Stress) देना भी बहुत जरूरी है। अंग्रेजी के लंबे शब्दों में किसी एक हिस्से को अधिक जोर से बोला जाता है, जिसे शब्दांश (Syllable) कहते हैं। यदि आप गलत हिस्से पर जोर देते हैं, तो शब्द का अर्थ पूरी तरह से बदल सकता है या वह सुनने में अजीब लग सकता है। शब्दकोश (Dictionary) का उपयोग करके यह जांचें कि किस अक्षर पर तनाव (Stress) देना है। यह अभ्यास आपकी बातचीत को अधिक प्रभावी (Effective) बनाता है।
बोलने की गति (Pace of Speech) आपके उच्चारण को प्रभावित करती है। बहुत तेज बोलने से शब्द आपस में मिल जाते हैं और उच्चारण अस्पष्ट (Indistinct) हो जाता है। मध्यम गति से बोलना आपको शब्दों के अंत में आने वाले व्यंजनों (Consonants), जैसे 's', 't' या 'd', को पूरी तरह से उच्चारित करने का समय देता है। स्पष्ट बोलना (Articulate speaking) आपके आत्मविश्वास (Confidence) को भी प्रदर्शित करता है।
नियमित रूप से अंग्रेजी सुनने की आदत (Listening Habit) डालें। जब आप देशी वक्ताओं (Native Speakers) को सुनते हैं, तो आपका मस्तिष्क अनजाने में ही शब्दों के सही स्वरूप (Correct Form) को ग्रहण करने लगता है। रेडियो साक्षात्कार (Radio Interviews) या समाचार सुनना इस कार्य के लिए बेहतरीन साधन हैं। सुनने और फिर उसी तरह बोलने का प्रयास (Shadowing Technique) आपके उच्चारण के स्तर को बहुत ऊपर ले जा सकता है।
रिकॉर्डिंग (Recording) करना आत्म-सुधार का सबसे अच्छा तरीका है। अपनी आवाज को रिकॉर्ड करें और फिर उसे ध्यान से सुनें कि आपने कहाँ गलती की है। अपनी तुलना किसी मानक ऑडियो (Standard Audio) से करें ताकि आप अपनी कमियों को पहचान सकें। यह निरंतर सुधार की प्रक्रिया (Process of Continuous Improvement) आपको परीक्षा के दिन स्पष्ट और प्रभावशाली वक्ता बनाएगी।