मेले के दौरान खाटू धाम में ठहरने (Staying) के लिए हजारों की संख्या में धर्मशालाएं (Dharamshalas) और गेस्ट हाउस (Guest Houses) उपलब्ध हैं। हालांकि, भारी भीड़ के कारण अधिकांश कमरे महीनों पहले ही आरक्षित (Pre-booked) हो जाते हैं। बहुत सी धर्मशालाएं सामाजिक ट्रस्टों (Social Trusts) द्वारा संचालित होती हैं, जहाँ बहुत ही कम दर पर या नि:शुल्क ठहरने की व्यवस्था होती है।
भोजन की बात करें तो मेले में 'भंडारा' (Community Feast) संस्कृति अपने चरम पर होती है। विभिन्न दानदाताओं (Donors) द्वारा विशाल रसोई घरों का संचालन किया जाता है, जहाँ भक्तों को ताजा और गरम भोजन (Hot Meals) आदरपूर्वक परोसा जाता है। इन भंडारों में दाल-बाटी, चूरमा, खिचड़ी और हलवा जैसे स्थानीय व्यंजन (Local Cuisine) प्रमुखता से मिलते हैं, जो बहुत स्वादिष्ट होते हैं।
निजी होटलों (Private Hotels) की उपलब्धता भी बढ़ गई है, जो आधुनिक सुविधाओं (Modern Amenities) जैसे एसी और वाई-फाई के साथ कमरे प्रदान करते हैं। मेले के समय होटलों के दाम (Rates) सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो सकते हैं, इसलिए यात्रियों को अपने बजट (Budget) के अनुसार पहले से योजना बनानी चाहिए। सुरक्षित ठहरने के लिए आधिकारिक रूप से पंजीकृत स्थानों का ही चयन करना चाहिए।
श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए बड़े-बड़े पंडाल (Large Tents) भी लगाए जाते हैं, जहाँ बिस्तर और पानी की सुविधा होती है। इन पंडालों में हजारों लोग एक साथ रुक सकते हैं, जिससे मेले में बढ़ती भीड़ को समायोजित (Accommodate) करने में मदद मिलती है। यहाँ सामुदायिक जीवन (Community Living) का एक अद्भुत अनुभव मिलता है जहाँ सभी भक्त एक समान भाव से रहते हैं।
अंततः, यदि आप मेले के दौरान आ रहे हैं, तो अपने पास जरूरी सामान (Essential Items) और दवाइयाँ अवश्य रखें। भोजन की गुणवत्ता (Quality of Food) की जाँच स्वयं करें और केवल साफ-सुथरी जगहों से ही जल ग्रहण करें। रहने और खाने की ये व्यवस्थाएं भक्तों की श्रद्धा को और मजबूत करती हैं और उन्हें बिना किसी चिंता के बाबा की भक्ति (Devotion) में लीन होने का अवसर प्रदान करती हैं।