खाटू श्याम जी की विश्व प्रसिद्ध आरती 'ॐ जय श्री श्याम हरे' के रचयिता श्री आलोक शर्मा (Shri Alok Sharma) माने जाते हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से बाबा की महिमा का बखान किया है। इस आरती का एक-एक शब्द बाबा के महान त्याग और उनकी शक्तियों (Powers) को समर्पित है। आरती में उनके शीश के दान (Donation of Head) की घटना का उल्लेख है, जो उनकी अटूट भक्ति और दानवीरता का प्रमाण है।
आरती के बोलों में उन्हें 'अधम उधारक' और 'भक्तों के रक्षक' (Protector of Devotees) के रूप में संबोधित किया गया है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि जो भी व्यक्ति अपने अहंकार को त्यागकर बाबा की शरण में आता है, उसे मोक्ष (Salvation) प्राप्त होता है। यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि एक भक्त का अपने आराध्य के प्रति समर्पण का भाव (Feeling of Surrender) है।
जब हम आरती गाते हैं, तो 'हारे का सहारा' (Support of the Defeated) शब्द हमें जीवन की कठिनाइयों में साहस प्रदान करते हैं। आरती में वर्णित बाबा के श्रृंगार और उनकी मोरछड़ी (Peacock Fan) की महिमा भक्तों को मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाती है। इस काव्य रचना (Poetic Composition) ने खाटू श्याम जी की महिमा को घर-घर तक पहुँचाने में एक बड़ी भूमिका निभाई है।
संगीत के दृष्टिकोण से भी यह आरती बहुत ही मधुर और हृदयस्पर्शी (Heart-touching) है। इसके बोल भक्तों को भगवान कृष्ण (Lord Krishna) और बर्बरीक के उस संवाद की याद दिलाते हैं जहाँ धर्म की रक्षा के लिए शीश दान किया गया था। आरती के अंतिम छंदों में फलश्रुति दी गई है, जिसका अर्थ है कि इसे प्रेमपूर्वक गाने वाले की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
आज के समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platforms) पर इस आरती के अनेक संस्करण उपलब्ध हैं, जिन्हें सुनकर भक्त अपनी सुबह की शुरुआत करते हैं। यह आरती हिंदू धर्म (Hinduism) में आस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। इसे सुनने और गाने से आत्मविश्वास (Self-confidence) बढ़ता है और जीवन की नकारात्मकता का नाश होता है।