श्याम बाबा के भजनों की रचना (Composition) में 'मोरछड़ी' और 'निशान' शब्दों का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक (Symbolic) है। मोरछड़ी मोर के पंखों से बनी होती है जिसे बाबा श्याम का सबसे प्रिय और चमत्कारी अस्त्र माना जाता है। भजनों में इसका उल्लेख अक्सर भक्तों के दुखों को दूर करने और नजर दोष (Evil Eye) को मिटाने के संदर्भ में किया जाता है। माना जाता है कि बाबा अपनी मोरछड़ी से झाड़ा लगाकर अपने भक्तों की सभी बाधाएं (Obstacles) दूर कर देते हैं।
निशान (Nishan) वास्तव में वह ध्वज (Flag) है जिसे भक्त पदयात्रा (Foot Pilgrimage) के दौरान अपने हाथों में लेकर चलते हैं। भजनों में 'निशान चढ़ाने' का अर्थ अपनी जीत और समर्पण को बाबा के चरणों में अर्पित करना है। यह ध्वज विजय का प्रतीक है और भक्तों की आस्था का प्रतिनिधित्व करता है। भजनों के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि जो भक्त हाथ में निशान लेकर खाटू आता है, बाबा उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं।
इन शब्दों का उपयोग भजनों में एक लय (Rhythm) और गहराई पैदा करता है। जब गायक 'मोरछड़ी लहराई रे' जैसा बोल गाता है, तो भक्तों के मन में बाबा के साक्षात दर्शन और उनके आशीर्वाद (Blessing) का अनुभव होता है। यह केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि ये करोड़ों श्याम प्रेमियों की भावनाओं (Emotions) से जुड़े हुए हैं। मोरछड़ी को शांति और सुरक्षा (Safety) का प्रतीक माना जाता है, जबकि निशान को धर्म की ध्वजा कहा जाता है।
भजन लेखक (Lyricists) इन प्रतीकों का उपयोग बाबा की दिव्य शक्तियों (Divine Powers) का बखान करने के लिए करते हैं। मोरछड़ी का कोमल स्पर्श भक्त के अहंकार को मिटाता है और उसे विनम्र बनाता है। वहीं, निशान की ऊँचाई भक्त के अटूट हौसले और प्रभु के प्रति उसकी निष्ठा (Loyalty) को दिखाती है। यही कारण है कि कोई भी श्याम भजन इन दो पवित्र प्रतीकों के वर्णन के बिना अधूरा माना जाता है।
संगीत की दृष्टि से भी ये शब्द भजनों को एक खास पहचान (Identity) देते हैं। जब ढोलक की थाप पर इन शब्दों का उच्चारण होता है, तो पूरा पांडाल झूम उठता है। ये शब्द भक्तों को खाटू की गलियों और वहां के दिव्य वातावरण (Environment) की याद दिलाते हैं। इन प्रतीकों के माध्यम से भजन हमें यह याद दिलाते रहते हैं कि बाबा हमेशा अपनी शक्ति और सुरक्षा के साथ हमारे अंग-संग हैं।