आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा द्वारा शुरू किए गए ज़ेप्टो (Zepto) ने बहुत कम समय में अरबों डॉलर का मूल्यांकन (Valuation) हासिल किया है। उन्होंने मुख्य रूप से 'क्विक कॉमर्स' (Quick Commerce) मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया जो 10 मिनट की डिलीवरी (10-minute Delivery) का वादा करता है। इस स्टार्टअप ने सीरीज ई (Series E) और एफ जैसे विभिन्न राउंड्स के माध्यम से लगभग 1.5 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश (Total Funding) जुटाया है। बड़े निवेशकों जैसे 'स्टेपस्टोन' (StepStone) और 'नेक्सस वेंचर' (Nexus Venture) ने उनके परिचालन कौशल पर भरोसा जताया है।
ज़ेप्टो की सफलता का मुख्य स्तंभ उनकी डार्क स्टोर (Dark Store) तकनीक और रसद प्रबंधन (Logistics Management) है। उन्होंने शहरों के भीतर छोटे गोदामों का एक सघन नेटवर्क बनाया है जो डिलीवरी के समय को न्यूनतम करता है। फंडिंग के पैसे का एक बड़ा हिस्सा इसी इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) को खड़ा करने में खर्च किया गया है। उनकी एल्गोरिदम (Algorithm) मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाने में मदद करती है, जिससे इन्वेंट्री का नुकसान (Wastage) कम होता है।
ग्राहक अधिग्रहण (Customer Acquisition) के लिए ज़ेप्टो ने बहुत ही आक्रामक मार्केटिंग (Aggressive Marketing) का सहारा लिया है। उन्होंने डिजिटल विज्ञापनों और छूट (Discounts) के जरिए शहरी युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया। उनके मोबाइल एप्लीकेशन (Mobile Application) को बहुत तेज और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है ताकि भुगतान (Checkout) प्रक्रिया सरल रहे। निवेश का उपयोग उन्होंने अपनी ब्रांड दृश्यता (Brand Visibility) बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर किया है।
परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बनाए रखना उनकी रणनीति का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने अन्य किराना स्टार्टअप्स के मुकाबले प्रति ऑर्डर की लागत (Cost per Order) को कम करने पर काम किया है। आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सीधा निर्माताओं से जोड़कर उन्होंने बेहतर मार्जिन (Margin) हासिल करने की कोशिश की है। विदेशी निवेशकों ने उनके इस कुशल बिजनेस मॉडल (Business Model) को देखकर ही बड़े निवेश किए हैं।
भविष्य में ज़ेप्टो अब केवल किराना ही नहीं बल्कि फार्मेसी (Pharmacy) और अन्य श्रेणियों में भी विस्तार कर रहा है। उनकी यूनिकॉर्न यात्रा यह दर्शाती है कि सही तकनीक (Right Technology) और बड़े निवेश के मेल से किसी भी स्थापित बाजार को बदला जा सकता है। भारत के सबसे कम उम्र के संस्थापकों द्वारा संचालित यह स्टार्टअप अब शेयर बाजार में सूचीबद्ध (IPO) होने की तैयारी कर रहा है।