तुषार कुमार और प्रशांत सिंह ने मेडलाइफ़ (Medlife) की शुरुआत इस समस्या को हल करने के लिए की थी कि मरीजों को अक्सर दुर्लभ दवाइयों (Rare Medicines) के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान भटकना पड़ता था। उन्होंने एक बहुत ही मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) तैयार की और एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जहाँ से लोग अपने पर्चे अपलोड करके दवाइयां मंगवा सकते थे। उन्होंने गुणवत्ता (Quality) और प्रामाणिकता (Authenticity) को अपना मूल मंत्र बनाया, जिससे ग्राहकों का भरोसा तेजी से बढ़ा।
उन्होंने 'इन्वेंट्री-आधारित मॉडल' (Inventory-based Model) का पालन किया, जिसका अर्थ था कि वे दवाइयों का स्टॉक खुद रखते थे ताकि डिलीवरी (Delivery) के समय और गुणवत्ता पर पूरा नियंत्रण रखा जा सके। उन्होंने अपनी खुद की डिलीवरी टीम (Delivery Team) बनाई जिसने बड़े शहरों में मात्र 24 घंटों के भीतर दवाइयां पहुँचाने का वादा किया। इस परिचालन उत्कृष्टता (Operational Excellence) ने उन्हें अन्य ई-कॉमर्स (E-commerce) खिलाड़ियों से बहुत आगे खड़ा कर दिया।
निवेशकों ने उनके इस बड़े बाजार और स्केलेबल मॉडल (Scalable Model) को देखते हुए करोड़ों डॉलर का निवेश किया। इस पूंजी (Capital) का उपयोग उन्होंने अन्य स्वास्थ्य सेवाओं जैसे डॉक्टर परामर्श (Doctor Consultation) और लैब डायग्नोस्टिक्स (Lab Diagnostics) में विस्तार करने के लिए किया। उन्होंने 'मेडलाइफ़ लैब्स' (Medlife Labs) की शुरुआत की जहाँ से लोग घर बैठे खून की जांच (Blood Tests) के लिए बुकिंग कर सकते थे। इस एकीकृत मॉडल (Integrated Model) ने उन्हें एक 'वन-स्टॉप हेल्थ सॉल्यूशन' बना दिया।
तकनीक (Technology) का उपयोग करते हुए उन्होंने एक ऐसा एल्गोरिदम (Algorithm) विकसित किया जो पुराने पर्चों के आधार पर मरीजों को दवाइयों की पुनरावृत्ति (Refill) के लिए याद दिलाता था। इस ग्राहक प्रतिधारण (Customer Retention) रणनीति ने उनके व्यापार को स्थिरता प्रदान की। उन्होंने कई छोटी क्षेत्रीय फार्मेसी कंपनियों का अधिग्रहण (Acquisition) किया ताकि वे अपनी पहुँच को और अधिक सघन बना सकें। अंततः उनका विलय (Merger) 'फ़ार्मईज़ी' (Pharmeasy) के साथ हुआ, जो भारतीय हेल्थटेक जगत का सबसे बड़ा एकीकरण (Consolidation) माना जाता है।
मेडलाइफ़ की कहानी यह सिखाती है कि स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) में वितरण (Distribution) की समस्या को तकनीक से कैसे हल किया जा सकता है। उन्होंने दवाओं की खरीदारी को बहुत सरल और पारदर्शी (Transparent) बना दिया। उनकी सफलता का राज यह था कि उन्होंने हमेशा ग्राहक की जरूरत को समझा और उसे पूरा करने के लिए अपनी तकनीक (Technology) को लगातार अपडेट किया। यह स्टार्टअप (Startup) ई-फार्मेसी (E-pharmacy) के उदय की एक वास्तविक और सफल दास्तां है।