भारत विविधताओं का देश है जहाँ एक ही त्यौहार को अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी स्थानीय संस्कृति (Local Culture) के अनुसार मनाया जाता है। उत्तर भारत की लोहड़ी, दक्षिण भारत में 'पोंगल' (Pongal) के रूप में मनाई जाती है, जो तमिलनाडु का एक प्रमुख कृषि उत्सव है। पोंगल पर लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं और चावल व दूध से बने विशेष व्यंजन तैयार करते हैं। यह त्यौहार भी नई फसल और प्रकृति के प्रति आभार (Gratitude towards Nature) व्यक्त करने का एक जरिया है।
असम और उत्तर-पूर्व भारत में इसे 'भोगली बिहू' (Bhogali Bihu) या माघ बिहू के नाम से मनाया जाता है। बिहू के दौरान लोग बांस और घास से अस्थायी घर (Meji) बनाते हैं और त्यौहार की अगली सुबह उन्हें अग्नि के हवाले कर देते हैं। इसमें भी सामूहिक भोज और पारंपरिक नृत्य (Traditional Dance) का विशेष महत्व होता है। बिहू का उत्सव भी कृषि चक्र (Agricultural Cycle) और सर्दियों की समाप्ति का प्रतीक है, जो समुदाय के लोगों को एक साथ लाता है।
गुजरात और राजस्थान में इस समय 'उत्तरायण' (Uttarayan) या मकर संक्रांति का जोश देखने को मिलता है, जहाँ पतंगबाजी (Kite Flying) मुख्य आकर्षण होती है। आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है और लोग 'तिल-गुड़' के लड्डू (Til-Gud Ladoo) बांटकर अपनी खुशियां जाहिर करते हैं। हालांकि मनाने का तरीका लोहड़ी से अलग है, लेकिन इसका मूल संदेश सूर्य का उत्तर की ओर गमन और अंधेरे से उजाले (Darkness to Light) की ओर बढ़ना ही है।
पश्चिम बंगाल में इसे 'पौष संक्रांति' (Poush Sankranti) के रूप में मनाया जाता है, जहाँ चावल के आटे से बनी 'पीठा' (Pitha) नामक मिठाई घर-घर में बनाई जाती है। गंगा सागर के तट पर पवित्र स्नान (Holy Dip) करने के लिए लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे 'पेद्दा पांडुगा' कहा जाता है, जहाँ मवेशियों (Livestock) को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। भारत का यह सांस्कृतिक संगम (Cultural Confluence) एक ही त्यौहार के अनेक रंगों को प्रदर्शित करता है।
नाम और परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन लोहड़ी और उसके समकक्ष त्यौहारों का केंद्र बिंदु फसल, सूर्य और अग्नि (Fire) ही रहते हैं। ये सभी उत्सव सर्दियों की विदाई और वसंत के स्वागत का जश्न मनाते हैं, जो जीवन की निरंतरता (Continuity of Life) का प्रतीक है। क्षेत्रीय विभिन्नताओं (Regional Variations) के बावजूद, इन त्यौहारों में निहित प्रेम और एकता का संदेश पूरे भारत को एक सूत्र में बांधता है। यह हमारी विरासत की खूबसूरती है कि हर राज्य अपनी अनूठी पहचान (Unique Identity) के साथ खुशियां मनाता है।