लोहड़ी के उत्सव में अलाव या पवित्र अग्नि (Lohri Bonfire) के चारों ओर परिक्रमा करना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ क्रिया (Auspicious Act) मानी जाती है। लोग अग्नि के चारों ओर घूमते हुए प्रार्थना (Prayer) करते हैं और उसमें रेवड़ी, मूंगफली व मक्का डालते हैं, जिसे 'अर्घ्य' देना कहा जाता है। आध्यात्मिक रूप से अग्नि को एक साक्षी (Witness) और माध्यम माना जाता है जो हमारी इच्छाओं को परमात्मा तक पहुँचाती है। परिक्रमा करना स्वयं को शुद्ध करने और ब्रह्मांड की ऊर्जा (Cosmic Energy) से जुड़ने का एक तरीका है।
अग्नि में तिल अर्पित करने का विशेष महत्व है क्योंकि तिल को पवित्रता (Purity) और अमरता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि अग्नि में जैसे-जैसे वस्तुएं जलती हैं, वैसे ही हमारे भीतर की बुराइयां और नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) भी जलकर भस्म हो जाते हैं। लोग "अदर आए, दलिदर जाए" (Let prosperity come, let poverty go) का नारा लगाते हुए सुख और समृद्धि की कामना करते हैं। यह क्रिया मानसिक शुद्धि (Mental Purification) और सकारात्मकता के संचार का माध्यम बनती है।
परिक्रमा करने से शरीर के भीतर एक नई चेतना (Consciousness) का संचार होता है और यह सामुदायिक भावना को भी प्रबल करता है। जब सभी लोग एक साथ एक ही दिशा में घूमते हैं, तो यह एकता और समानता (Equality) का संदेश देता है। लोहड़ी की अग्नि के ताप को ग्रहण करना न केवल ठंड से राहत देता है, बल्कि यह हमारे मन की जड़ता (Inertia) को भी खत्म करता है। यह अनुष्ठान जीवन में गतिशीलता और प्रगति (Progress) लाने की प्रेरणा देता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अग्नि को पंचतत्वों (Five Elements) में सबसे पवित्र माना गया है क्योंकि यह हर अशुद्धि को जला देती है लेकिन खुद कभी अशुद्ध नहीं होती। लोहड़ी पर अग्नि की पूजा करना सूर्य देव की ऊर्जा का सम्मान करना है, क्योंकि सूर्य ही पृथ्वी पर जीवन का स्रोत (Source of Life) है। अलाव के चारों ओर लोक गीत गाना और नृत्य करना ईश्वर के प्रति अपनी प्रसन्नता और आभार व्यक्त करने का एक तरीका है। यह परंपरा प्राचीन काल से हमारे आध्यात्मिक दर्शन (Spiritual Philosophy) का हिस्सा रही है।
अग्नि के शांत होने के बाद, उसकी राख (Ash) को लोग अपने माथे पर तिलक के रूप में लगाते हैं या खेतों में फैलाते हैं, जो उर्वरता (Fertility) और सौभाग्य का प्रतीक है। यह विश्वास है कि लोहड़ी की अग्नि की गर्मी पूरे साल घर में शांति और गर्माहट बनाए रखती है। इस प्रकार, लोहड़ी की परिक्रमा केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह आत्मा के उत्थान और कृतज्ञता (Gratitude) का एक गहरा अनुभव है। यह त्यौहार हमें प्रकृति की शक्तियों के प्रति नतमस्तक होना सिखाता है।