भारतीय समाज में नई शादी के बाद आने वाली पहली लोहड़ी और घर में जन्मे पहले बच्चे (First Born Child) के लिए यह पर्व अत्यंत गौरवपूर्ण होता है। नई वधू (New Bride) के लिए यह दिन एक उत्सव जैसा होता है जहाँ वह अपनी सबसे सुंदर पारंपरिक वेशभूषा (Traditional Attire) और आभूषण पहनती है। ससुराल पक्ष की ओर से बहू को शगुन (Token of Luck) के रूप में नए वस्त्र, फल और सूखे मेवे दिए जाते हैं। यह रस्म बहू के प्रति परिवार के प्रेम और उसे लक्ष्मी के रूप में स्वीकार करने का प्रतीक (Symbol of Acceptance) मानी जाती है।
घर के छोटे बच्चे (Infant) के लिए भी पहली लोहड़ी पर 'मूँगफली बांटना' और 'लोहड़ी मांगना' जैसी विशेष गतिविधियाँ की जाती हैं। बच्चे को नए गर्म कपड़े (Winter Wear) पहनाए जाते हैं और मामा व नाना-नानी की ओर से विशेष उपहार (Special Gifts) भेजे जाते हैं। बच्चे को अलाव (Bonfire) के पास ले जाकर बुजुर्गों द्वारा आशीर्वाद दिलाया जाता है ताकि उसे बुरी नजर से बचाया जा सके। यह बच्चे के सामाजिक जीवन की पहली बड़ी शुरुआत और पारिवारिक उत्सव (Family Celebration) होता है।
शाम के समय जब मुख्य अलाव (Main Fire) जलाया जाता है, तो नई वधू और बच्चा (Bride and Baby) मिलकर अग्नि की परिक्रमा करते हैं। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य लोक गीत गाते हैं और ढोल की थाप पर नृत्य करते हैं। लोग जोड़े और बच्चे पर रेवड़ी और मूँगफली (Rewari and Peanuts) छिड़कते हैं, जिसे खुशहाली और उर्वरता (Fertility) का सूचक माना जाता है। यह रस्म परिवार के नए सदस्यों को समुदाय के साथ जोड़ने और उन्हें अपनी संस्कृति (Culture) का हिस्सा बनाने का तरीका है।
रिश्तेदारों और पड़ोसियों को इस अवसर पर रात्रिभोज (Dinner) के लिए आमंत्रित किया जाता है, जहाँ विशेष रूप से 'कोथली' (Kothli) यानी उपहारों का आदान-प्रदान होता है। नई बहू अपने हाथों से मेहमानों को मिठाइयां परोसती है, जिसे उसके घर में बसने की सकारात्मक शुरुआत (Positive Start) माना जाता है। मेहमान भी नव-विवाहित जोड़े और बच्चे को अपनी नेक दुआएं और नकद शगुन (Cash Shagun) देते हैं। यह सामाजिक मेलजोल (Social Interaction) परिवार के बंधनों को और भी अधिक प्रगाढ़ और मधुर बनाता है।
इस पूरे समारोह का मुख्य उद्देश्य परिवार में आए नए सदस्यों का स्वागत (Welcome) करना और उनके उज्ज्वल भविष्य (Bright Future) की कामना करना है। लोहड़ी की यह अग्नि उनके जीवन के सभी कष्टों को जला दे और उन्हें अपार सुख प्रदान करे, यही इस रस्म का आध्यात्मिक सार (Spiritual Essence) है। आधुनिक समय में इन रस्मों को और भी भव्य तरीके से मनाया जाता है ताकि यह दिन हमेशा के लिए यादगार बन जाए। खुशियों को साझा करने की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण (Significant) है।