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अरावली पर्वतमाला (Aravali Range) को विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत श्रृंखलाओं (Oldest Fold Mountains) में से एक माना जाता है, जिसका निर्माण प्री-कैम्ब्रियन काल (Pre-Cambrian Era) में हुआ था। यह उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग 692 किलोमीटर की लंबाई में फैली हुई है, जो गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर राजस्थान और हरियाणा को पार करते हुए दिल्ली तक पहुँचती है। इस पर्वतमाला का अधिकांश भाग राजस्थान में स्थित है, जो राज्य को दो असमान भौगोलिक भागों (Geographical Parts) में विभाजित करता है। यह प्राकृतिक अवरोध (Natural Barrier) थार मरुस्थल के पूर्व की ओर प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भौगोलिक दृष्टि से अरावली की बनावट अत्यंत जटिल है, जिसमें क्वार्टजाइट (Quartzite), शिस्ट और गनीस जैसी चट्टानों की प्रधानता है। समय के साथ अत्यधिक अपरदन (Erosion) और अपक्षय के कारण अब यह अवशिष्ट पर्वतों (Residual Mountains) के रूप में दिखाई देती है। इसकी औसत ऊँचाई दक्षिण-पश्चिम में अधिक है और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ते हुए यह पहाड़ियों के छोटे समूहों में बदल जाती है। इन पहाड़ियों ने सदियों से भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु (Climate) और पारिस्थितिकी को प्रभावित किया है, जिससे यह एक अद्वितीय भौगोलिक संरचना (Geographical Structure) बन गई है।

अरावली पर्वतमाला (Aravali Mountain) जैव विविधता (Biodiversity) का एक विशाल भंडार है, जहाँ औषधीय पादपों और वन्यजीवों की अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ के घने जंगलों में तेंदुये, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे जानवर निवास करते हैं, जो पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखने में सहायक हैं। यह श्रृंखला कई महत्वपूर्ण नदियों जैसे बनास, लूनी और साबरमती का उद्गम स्थल (Origin Point) भी है। जल संसाधनों के संरक्षण और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के लिए इन पहाड़ों का महत्व अतुलनीय है।

खनिज संपदा (Mineral Resources) के मामले में अरावली भारत की सबसे समृद्ध श्रेणियों में गिनी जाती है, जहाँ तांबा, जस्ता, सीसा और संगमरमर (Marble) प्रचुर मात्रा में मिलता है। राजस्थान के उदयपुर और खेतड़ी जैसे क्षेत्र इन खनिजों के खनन (Mining) के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। यहाँ मिलने वाला पत्थर न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी निर्माण कार्यों के लिए निर्यात किया जाता है। हालांकि, अनियंत्रित खनन गतिविधियों ने वर्तमान में इन पहाड़ों की स्थिरता और पर्यावरण (Environment) के लिए गंभीर चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं।

ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अरावली का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यहाँ माउंट आबू (Mount Abu) जैसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन स्थित हैं। गुरु शिखर (Guru Shikhar), जो 1722 मीटर ऊँचा है, इस पूरी पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी है। यहाँ के प्राचीन मंदिर और किले राजपूत वीरता और वास्तुकला (Architecture) के जीवंत उदाहरण पेश करते हैं। अरावली न केवल एक भौतिक संरचना है, बल्कि यह उत्तर भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक जीवनरेखा (Economic Lifeline) भी है जिसे बचाना अनिवार्य है।

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अरावली पर्वतमाला (Aravali Range) को विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत श्रृंखलाओं (Oldest Fold Mountains) में से एक माना जाता है, जिसका निर्माण प्री-कैम्ब्रियन काल (Pre-Cambrian Era) में हुआ था। यह उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग 692 किलोमीटर की लंबाई में फैली हुई है, जो गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर राजस्थान और हरियाणा को पार करते हुए दिल्ली तक पहुँचती है। इस पर्वतमाला का अधिकांश भाग राजस्थान में स्थित है, जो राज्य को दो असमान भौगोलिक भागों (Geographical Parts) में विभाजित करता है। यह प्राकृतिक अवरोध (Natural Barrier) थार मरुस्थल के पूर्व की ओर प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भौगोलिक दृष्टि से अरावली की बनावट अत्यंत जटिल है, जिसमें क्वार्टजाइट (Quartzite), शिस्ट और गनीस जैसी चट्टानों की प्रधानता है। समय के साथ अत्यधिक अपरदन (Erosion) और अपक्षय के कारण अब यह अवशिष्ट पर्वतों (Residual Mountains) के रूप में दिखाई देती है। इसकी औसत ऊँचाई दक्षिण-पश्चिम में अधिक है और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ते हुए यह पहाड़ियों के छोटे समूहों में बदल जाती है। इन पहाड़ियों ने सदियों से भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु (Climate) और पारिस्थितिकी को प्रभावित किया है, जिससे यह एक अद्वितीय भौगोलिक संरचना (Geographical Structure) बन गई है।

अरावली पर्वतमाला (Aravali Mountain) जैव विविधता (Biodiversity) का एक विशाल भंडार है, जहाँ औषधीय पादपों और वन्यजीवों की अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ के घने जंगलों में तेंदुये, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे जानवर निवास करते हैं, जो पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखने में सहायक हैं। यह श्रृंखला कई महत्वपूर्ण नदियों जैसे बनास, लूनी और साबरमती का उद्गम स्थल (Origin Point) भी है। जल संसाधनों के संरक्षण और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के लिए इन पहाड़ों का महत्व अतुलनीय है।

खनिज संपदा (Mineral Resources) के मामले में अरावली भारत की सबसे समृद्ध श्रेणियों में गिनी जाती है, जहाँ तांबा, जस्ता, सीसा और संगमरमर (Marble) प्रचुर मात्रा में मिलता है। राजस्थान के उदयपुर और खेतड़ी जैसे क्षेत्र इन खनिजों के खनन (Mining) के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। यहाँ मिलने वाला पत्थर न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी निर्माण कार्यों के लिए निर्यात किया जाता है। हालांकि, अनियंत्रित खनन गतिविधियों ने वर्तमान में इन पहाड़ों की स्थिरता और पर्यावरण (Environment) के लिए गंभीर चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं।

ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अरावली का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यहाँ माउंट आबू (Mount Abu) जैसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन स्थित हैं। गुरु शिखर (Guru Shikhar), जो 1722 मीटर ऊँचा है, इस पूरी पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी है। यहाँ के प्राचीन मंदिर और किले राजपूत वीरता और वास्तुकला (Architecture) के जीवंत उदाहरण पेश करते हैं। अरावली न केवल एक भौतिक संरचना है, बल्कि यह उत्तर भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक जीवनरेखा (Economic Lifeline) भी है जिसे बचाना अनिवार्य है।
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