अरावली पर्वतमाला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण पर्यटकों (Tourists) के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र रही है। माउंट आबू (Mount Abu), जो अरावली का एकमात्र हिल स्टेशन है, अपनी ठंडी जलवायु और नक्की झील के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के दिलवाड़ा जैन मंदिर (Dilwara Jain Temples) अपनी बारीक नक्काशी और संगमरमर की वास्तुकला के लिए विश्व भर में विख्यात हैं। ऊँची चोटियों और गहरी घाटियों के बीच बसा यह स्थान आध्यात्मिकता और शांति (Peace) की तलाश करने वालों के लिए स्वर्ग समान है।
धार्मिक महत्ता की दृष्टि से अरावली में पुष्कर (Pushkar) का विशेष स्थान है, जहाँ विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर स्थित है। पवित्र पुष्कर झील के चारों ओर की पहाड़ियाँ एक आध्यात्मिक वातावरण (Spiritual Atmosphere) का निर्माण करती हैं। इसी प्रकार, अजमेर में तारागढ़ पहाड़ी पर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह सांप्रदायिक सद्भाव और विश्वास का प्रतीक है। अरावली की गुफाओं और शिखरों पर कई प्राचीन मंदिर और आश्रम (Ashrams) स्थित हैं जहाँ ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी।
ऐतिहासिक किलों (Historical Forts) के शौकीनों के लिए अरावली एक खजाना है, क्योंकि यहाँ कुंभलगढ़, नाहरगढ़ और आमेर जैसे दुर्ग स्थित हैं। कुंभलगढ़ किले की दीवार, जो चीन की महान दीवार के बाद दुनिया में दूसरी सबसे लंबी दीवार है, अरावली की ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों पर फैली हुई है। इन किलों से सूर्यास्त (Sunset) का दृश्य देखना पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव होता है। यह पहाड़ियाँ न केवल युद्ध की गवाह रही हैं बल्कि राजपूत कला और संस्कृति (Art and Culture) की संरक्षक भी रही हैं।
साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के लिए अरावली की ऊँची-नीची ढलानें ट्रैकिंग, रॉक क्लाइंबिंग और कैंपिंग के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व (Sariska Tiger Reserve) और रणथंभौर जैसे अभयारण्य इन्हीं पहाड़ियों के आँचल में स्थित हैं, जहाँ सैलानी बाघों और अन्य वन्यजीवों (Wildlife) को देख सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यहाँ की शांत घाटियाँ और झरने शहरी कोलाहल से दूर सुकून प्रदान करते हैं। ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) के माध्यम से लोग यहाँ की लोक संस्कृति और खान-पान का लुत्फ उठाते हैं।
पर्यटन (Tourism) के बढ़ते दबाव ने अरावली की संवेदनशील पारिस्थितिकी पर तनाव पैदा किया है, जिसे प्रबंधित करने की आवश्यकता है। इको-टूरिज्म (Eco-tourism) को बढ़ावा देकर हम इन पहाड़ियों की सुंदरता को बिना नुकसान पहुँचाए दुनिया को दिखा सकते हैं। अरावली का हर पत्थर एक कहानी कहता है और यहाँ की हवाओं में इतिहास की गूँज सुनाई देती है। इन पर्यटन स्थलों का संरक्षण हमारी साझी विरासत (Shared Heritage) को जीवित रखने के लिए बहुत जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसकी भव्यता का आनंद ले सकें।