हरियाणा के शहरी कोलाहल से दूर अरावली की पहाड़ियाँ (Aravali Hills) प्रकृति प्रेमियों के लिए एक शानदार आश्रय स्थल प्रदान करती हैं। गुरुग्राम में स्थित अरावली जैव विविधता पार्क (Aravali Biodiversity Park) पारिस्थितिक बहाली का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ आप देशी पौधों की सैकड़ों प्रजातियाँ देख सकते हैं। यह स्थान पैदल चलने (Walking) और पक्षी दर्शन (Bird Watching) के लिए बहुत प्रसिद्ध है, जहाँ लोग सुबह की ताजी हवा का आनंद लेने आते हैं। शहरी भीड़भाड़ के बीच यह एक 'ग्रीन लंग' (Green Lung) की तरह काम करता है जो मन को शांति देता है।
फरीदाबाद के पास स्थित सूरजकुंड और मांगर बनी (Mangar Bani) का जंगल अरावली की प्राचीन सुंदरता को समेटे हुए है। मांगर बनी को एक पवित्र उपवन (Sacred Grove) माना जाता है, जहाँ सदियों से पेड़ों को काटना वर्जित है, जिससे यहाँ का वन्यजीव आवास (Wildlife Habitat) सुरक्षित बचा हुआ है। यहाँ की पगडंडियाँ रोमांच चाहने वाले ट्रेकर्स (Trekkers) के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण और आनंददायक होती हैं। प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए यह क्षेत्र दिल्ली एनसीआर (NCR) के लोगों की पहली पसंद बन गया है।
दमदमा झील (Damdama Lake) अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसी एक और खूबसूरत जगह है, जहाँ आप नौका विहार और साहसिक गतिविधियों (Adventure Activities) का आनंद ले सकते हैं। पहाड़ियों से घिरी यह झील मानसून के दौरान और भी अधिक जीवंत हो जाती है, जब चारों ओर हरियाली छा जाती है। यहाँ कई रिसॉर्ट्स (Resorts) और कैंपिंग साइट्स विकसित हो गई हैं, जो सप्ताहांत की छुट्टियों (Weekend Getaways) के लिए एकदम सही हैं। पहाड़ियों का पथरीला रास्ता और शांत पानी एक अद्भुत दृश्य अनुभव (Visual Experience) प्रदान करते हैं।
धार्मिक और ऐतिहासिक रुचि रखने वालों के लिए नूह जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियाँ (Aravali Hills) कई प्राचीन मंदिरों और किलों के अवशेषों को संजोए हुए हैं। कोटला झील और उसके पास की पहाड़ियाँ एक अलग ही शांत वातावरण प्रदान करती हैं, जहाँ इतिहास की गूँज सुनाई देती है। इन क्षेत्रों में ट्रैकिंग (Trekking) करते समय आप अरावली की विशिष्ट भूगर्भीय संरचनाओं (Geological Formations) को करीब से देख सकते हैं। यहाँ की चट्टानी बनावट फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करती है।
अरावली की पहाड़ियों (Aravali Hills) में स्थित ये सभी स्थान न केवल पर्यटन के केंद्र हैं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के रक्षक भी हैं। यहाँ की यात्रा करते समय हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम कूड़ा न फैलाएं और पर्यावरण की शुद्धता (Purity of Environment) बनाए रखें। इन पहाड़ियों का संरक्षण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत जरूरी है ताकि वे भी इस प्राकृतिक विरासत का आनंद ले सकें। सरकार अब इन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म (Eco-tourism) को और अधिक बढ़ावा देने की योजना बना रही है।