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अरावली पर्वतमाला (Aravali Range) अपनी विशिष्ट जलवायु और मिट्टी के कारण दुर्लभ पौधों (Rare Plants) और झाड़ियों की अनेक प्रजातियों को सहारा देती है। इनमें 'कडाया' (Sterculia urens) जैसे पेड़ शामिल हैं, जिनकी छाल से प्राप्त गोंद का उपयोग खाद्य और दवा उद्योगों में किया जाता है। यहाँ की शुष्क वनस्पति (Xerophytic Vegetation) कम पानी में भी जीवित रहने की अद्भुत क्षमता रखती है। ये पौधे न केवल मिट्टी को पकड़े रखते हैं बल्कि पारिस्थितिकी (Ecology) को मजबूती भी प्रदान करते हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर 'गुग्गुल' (Commiphora wightii) अरावली का एक अत्यंत कीमती पौधा है, जो अब विलुप्त होने की श्रेणी (Endangered Category) में आ गया है। इसके तेल और राल का उपयोग विभिन्न औषधियों और पूजा अनुष्ठानों में किया जाता है। इन वनस्पतियों (Flora) का संरक्षण करना जैव-विविधता की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये स्थानीय जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) के लिए आधार प्रदान करते हैं। प्रकृति का यह औषधालय (Natural Dispensary) हमारी अमूल्य संपत्ति है।

अरावली के जंगलों में 'ढोक' (Anogeissus pendula) के पेड़ सबसे अधिक पाए जाते हैं, जो पहाड़ियों के ढलानों पर एक हरित चादर (Green Carpet) की तरह बिछे होते हैं। यह वृक्ष न केवल जलाऊ लकड़ी और चारा प्रदान करता है, बल्कि जंगली जानवरों को छिपने के लिए घना आवास (Habitat) भी देता है। इसकी गहरी जड़ें पहाड़ों की स्थिरता (Stability) बनाए रखने में मदद करती हैं और मृदा अपरदन (Soil Erosion) को प्रभावी ढंग से रोकती हैं। यह अरावली का सबसे मजबूत स्तंभ (Strongest Pillar) माना जाता है।

विभिन्न प्रकार की घास और झाड़ियाँ (Shrubs) भी इस क्षेत्र की जैव विविधता (Biodiversity) का अहम हिस्सा हैं, जो छोटे जीवों और कीटों को भोजन प्रदान करती हैं। 'सेवन' और 'धामन' जैसी घास पशुपालन (Animal Husbandry) के लिए अत्यंत पौष्टिक मानी जाती हैं। इन वनस्पतियों (Flora) का सही प्रबंधन करने से स्थानीय चरागाहों की स्थिति में सुधार होता है। जैव विविधता (Biodiversity) के इस सूक्ष्म तंत्र को समझना और बचाना पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

वन विभाग अब अरावली की इन दुर्लभ वनस्पतियों (Rare Flora) को नर्सरी में उगाने और उनके पुनर्रोपण (Replanting) पर जोर दे रहा है। बीजों के संग्रह (Seed Collection) और उनके संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में प्राकृतिक वन (Natural Forest) को फिर से सघन बनाया जा सके। वनस्पतियों की यह विविधता हमारे पर्यावरण को लचीला (Resilient) बनाती है और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों से लड़ने की शक्ति देती है।

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अरावली पर्वतमाला (Aravali Range) अपनी विशिष्ट जलवायु और मिट्टी के कारण दुर्लभ पौधों (Rare Plants) और झाड़ियों की अनेक प्रजातियों को सहारा देती है। इनमें 'कडाया' (Sterculia urens) जैसे पेड़ शामिल हैं, जिनकी छाल से प्राप्त गोंद का उपयोग खाद्य और दवा उद्योगों में किया जाता है। यहाँ की शुष्क वनस्पति (Xerophytic Vegetation) कम पानी में भी जीवित रहने की अद्भुत क्षमता रखती है। ये पौधे न केवल मिट्टी को पकड़े रखते हैं बल्कि पारिस्थितिकी (Ecology) को मजबूती भी प्रदान करते हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर 'गुग्गुल' (Commiphora wightii) अरावली का एक अत्यंत कीमती पौधा है, जो अब विलुप्त होने की श्रेणी (Endangered Category) में आ गया है। इसके तेल और राल का उपयोग विभिन्न औषधियों और पूजा अनुष्ठानों में किया जाता है। इन वनस्पतियों (Flora) का संरक्षण करना जैव-विविधता की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये स्थानीय जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) के लिए आधार प्रदान करते हैं। प्रकृति का यह औषधालय (Natural Dispensary) हमारी अमूल्य संपत्ति है।

अरावली के जंगलों में 'ढोक' (Anogeissus pendula) के पेड़ सबसे अधिक पाए जाते हैं, जो पहाड़ियों के ढलानों पर एक हरित चादर (Green Carpet) की तरह बिछे होते हैं। यह वृक्ष न केवल जलाऊ लकड़ी और चारा प्रदान करता है, बल्कि जंगली जानवरों को छिपने के लिए घना आवास (Habitat) भी देता है। इसकी गहरी जड़ें पहाड़ों की स्थिरता (Stability) बनाए रखने में मदद करती हैं और मृदा अपरदन (Soil Erosion) को प्रभावी ढंग से रोकती हैं। यह अरावली का सबसे मजबूत स्तंभ (Strongest Pillar) माना जाता है।

विभिन्न प्रकार की घास और झाड़ियाँ (Shrubs) भी इस क्षेत्र की जैव विविधता (Biodiversity) का अहम हिस्सा हैं, जो छोटे जीवों और कीटों को भोजन प्रदान करती हैं। 'सेवन' और 'धामन' जैसी घास पशुपालन (Animal Husbandry) के लिए अत्यंत पौष्टिक मानी जाती हैं। इन वनस्पतियों (Flora) का सही प्रबंधन करने से स्थानीय चरागाहों की स्थिति में सुधार होता है। जैव विविधता (Biodiversity) के इस सूक्ष्म तंत्र को समझना और बचाना पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

वन विभाग अब अरावली की इन दुर्लभ वनस्पतियों (Rare Flora) को नर्सरी में उगाने और उनके पुनर्रोपण (Replanting) पर जोर दे रहा है। बीजों के संग्रह (Seed Collection) और उनके संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में प्राकृतिक वन (Natural Forest) को फिर से सघन बनाया जा सके। वनस्पतियों की यह विविधता हमारे पर्यावरण को लचीला (Resilient) बनाती है और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों से लड़ने की शक्ति देती है।
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