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सर्दियों के मौसम में अरावली की घाटियों और मैदानी इलाकों में कोहरा (Fog) और शीत लहर (Cold Wave) का प्रभाव प्रमुखता से देखा जाता है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में उत्तर की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं जब अरावली की पहाड़ियों से टकराती हैं, तो वे नीचे की ओर दबती हैं। इसके कारण वायुमंडल की निचली सतह में नमी जमा हो जाती है और घना कोहरा (Dense Fog) छा जाता है। यह दृश्यता (Visibility) को कम कर देता है और परिवहन व्यवस्था को प्रभावित करता है, लेकिन फसलों के लिए यह नमी (Moisture) लाभदायक होती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय विकिरण शीतलन (Radiational Cooling) के कारण तापमान बहुत तेजी से गिरता है। अरावली की ऊँची चोटियों पर ठंडी हवाएँ भारी होकर घाटियों में जमा हो जाती हैं, जिसे 'तापमान व्युत्क्रमण' (Temperature Inversion) कहा जाता है। इस प्रक्रिया के कारण पहाड़ियों के नीचे बसे गाँवों में अधिक ठंड महसूस होती है। शीत लहर (Cold Wave) के दौरान अरावली का शुष्क वातावरण और भी कठोर हो जाता है, जिससे वन्यजीवों और पशुधन (Livestock) को संघर्ष करना पड़ता है।

सर्दियों की जलवायु (Winter Climate) के दौरान 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के कारण कभी-कभी हल्की वर्षा भी होती है जिसे 'मावट' कहा जाता है। यह वर्षा अरावली की पहाड़ियों और उसके पास की रबी फसलों (Rabi Crops) जैसे गेहूँ और सरसों के लिए अमृत के समान होती है। यह हल्की बारिश पहाड़ियों की धूल को साफ कर देती है और वनस्पतियों को नया जीवन प्रदान करती है। मावट (Mawat) का होना अरावली की कृषि-जलवायु (Agro-climate) का एक अत्यंत सकारात्मक पहलू है।

अरावली की पहाड़ियाँ शीत लहर (Cold Wave) के विरुद्ध एक रक्षक की तरह काम करती हैं, जो दक्षिणी राजस्थान को अत्यधिक ठंड से बचाती हैं। पहाड़ियों की ऊँचाई ठंडी हवाओं के सीधे प्रवाह को रोकती है जिससे दक्षिण की ओर बढ़ते हुए ठंड की तीव्रता (Intensity of Cold) कम हो जाती है। यह जलवायु अवरोधक (Climatic Barrier) न केवल लोगों को राहत देता है बल्कि संवेदनशील पौधों की प्रजातियों को भी सुरक्षित रखता है। अरावली का यह भौगोलिक योगदान सर्दियों के मौसम को सहनीय बनाता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण अब सर्दियों की अवधि और कोहरे के घनत्व में काफी बदलाव (Changes) देखा जा रहा है। कभी सर्दी बहुत कम समय के लिए आती है तो कभी अचानक बहुत अधिक शीत लहर चलती है। वनों के कम होने से पहाड़ियों की ऊष्मीय रोधन (Thermal Insulation) की क्षमता घटी है जिससे मौसम अधिक चरम (Extreme) होता जा रहा है। अरावली की प्राकृतिक संरचना और इसके जंगलों को बचाकर ही हम सर्दियों की इस सुंदर और संतुलित जलवायु (Balanced Climate) को भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।

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सर्दियों के मौसम में अरावली की घाटियों और मैदानी इलाकों में कोहरा (Fog) और शीत लहर (Cold Wave) का प्रभाव प्रमुखता से देखा जाता है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में उत्तर की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं जब अरावली की पहाड़ियों से टकराती हैं, तो वे नीचे की ओर दबती हैं। इसके कारण वायुमंडल की निचली सतह में नमी जमा हो जाती है और घना कोहरा (Dense Fog) छा जाता है। यह दृश्यता (Visibility) को कम कर देता है और परिवहन व्यवस्था को प्रभावित करता है, लेकिन फसलों के लिए यह नमी (Moisture) लाभदायक होती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय विकिरण शीतलन (Radiational Cooling) के कारण तापमान बहुत तेजी से गिरता है। अरावली की ऊँची चोटियों पर ठंडी हवाएँ भारी होकर घाटियों में जमा हो जाती हैं, जिसे 'तापमान व्युत्क्रमण' (Temperature Inversion) कहा जाता है। इस प्रक्रिया के कारण पहाड़ियों के नीचे बसे गाँवों में अधिक ठंड महसूस होती है। शीत लहर (Cold Wave) के दौरान अरावली का शुष्क वातावरण और भी कठोर हो जाता है, जिससे वन्यजीवों और पशुधन (Livestock) को संघर्ष करना पड़ता है।

सर्दियों की जलवायु (Winter Climate) के दौरान 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के कारण कभी-कभी हल्की वर्षा भी होती है जिसे 'मावट' कहा जाता है। यह वर्षा अरावली की पहाड़ियों और उसके पास की रबी फसलों (Rabi Crops) जैसे गेहूँ और सरसों के लिए अमृत के समान होती है। यह हल्की बारिश पहाड़ियों की धूल को साफ कर देती है और वनस्पतियों को नया जीवन प्रदान करती है। मावट (Mawat) का होना अरावली की कृषि-जलवायु (Agro-climate) का एक अत्यंत सकारात्मक पहलू है।

अरावली की पहाड़ियाँ शीत लहर (Cold Wave) के विरुद्ध एक रक्षक की तरह काम करती हैं, जो दक्षिणी राजस्थान को अत्यधिक ठंड से बचाती हैं। पहाड़ियों की ऊँचाई ठंडी हवाओं के सीधे प्रवाह को रोकती है जिससे दक्षिण की ओर बढ़ते हुए ठंड की तीव्रता (Intensity of Cold) कम हो जाती है। यह जलवायु अवरोधक (Climatic Barrier) न केवल लोगों को राहत देता है बल्कि संवेदनशील पौधों की प्रजातियों को भी सुरक्षित रखता है। अरावली का यह भौगोलिक योगदान सर्दियों के मौसम को सहनीय बनाता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण अब सर्दियों की अवधि और कोहरे के घनत्व में काफी बदलाव (Changes) देखा जा रहा है। कभी सर्दी बहुत कम समय के लिए आती है तो कभी अचानक बहुत अधिक शीत लहर चलती है। वनों के कम होने से पहाड़ियों की ऊष्मीय रोधन (Thermal Insulation) की क्षमता घटी है जिससे मौसम अधिक चरम (Extreme) होता जा रहा है। अरावली की प्राकृतिक संरचना और इसके जंगलों को बचाकर ही हम सर्दियों की इस सुंदर और संतुलित जलवायु (Balanced Climate) को भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
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