अरावली की पहाड़ियों में होने वाली भारी ब्लास्टिंग (Heavy Blasting) का स्थानीय ग्रामीणों के जीवन पर बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। धमाकों की वजह से निकलने वाली तीव्र तरंगों के कारण गाँवों के घरों की दीवारों में दरारें (Cracks in Walls) आ रही हैं, जिससे लोगों को हमेशा मकान गिरने का डर सताता रहता है। इसके साथ ही, ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाले पत्थर और मलबा कभी-कभी लोगों के खेतों और मवेशियों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। यह निरंतर होने वाला शोर मानसिक तनाव (Mental Stress) का कारण बन रहा है, जिससे शांतिपूर्ण ग्रामीण जीवन पूरी तरह बाधित हो गया है।
आर्थिक दृष्टि से देखें तो खनन (Mining) ने स्थानीय कृषि और पशुपालन (Animal Husbandry) को बर्बाद कर दिया है। खनन क्षेत्रों से निकलने वाली धूल की मोटी परत फसलों और चरागाहों पर जमा हो जाती है, जिससे चारे की गुणवत्ता खराब हो जाती है और पशु बीमार होने लगते हैं। जल स्रोतों के सूखने या प्रदूषित होने के कारण खेती करना लगभग असंभव हो गया है, जिससे ग्रामीण ऋण के जाल (Debt Trap) में फँस रहे हैं। यह स्थिति पलायन (Migration) को बढ़ावा दे रही है क्योंकि लोगों के पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं बचा है।
स्वास्थ्य के मोर्चे पर अरावली के आसपास बसे गाँवों में श्वसन संबंधी बीमारियों (Respiratory Diseases) का प्रकोप बहुत अधिक है। धूल के बारीक कण (Fine Dust Particles) हवा में चौबीसों घंटे मौजूद रहते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा और टीबी जैसी बीमारियाँ आम हो गई हैं। स्थानीय अस्पतालों में फेफड़ों के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य पर होने वाला भारी खर्च (Medical Expenses) इन परिवारों की आर्थिक स्थिति को और अधिक दयनीय बना देता है।
सामाजिक रूप से भी खनन (Mining) ने गाँवों के भाईचारे को प्रभावित किया है, क्योंकि अक्सर खनन कंपनियों और स्थानीय लोगों के बीच संघर्ष (Conflict) की स्थिति बनी रहती है। ब्लास्टिंग के कारण गाँवों का शांत वातावरण अब भारी मशीनों और ट्रकों के शोर से भर गया है, जिससे शांति और सुकून खत्म हो गया है। कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल (Religious Sites) भी इन धमाकों की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जिससे लोगों की सांस्कृतिक भावनाओं (Cultural Sentiments) को ठेस पहुँच रही है।
विकास के नाम पर अरावली का यह विनाश स्थानीय समुदायों (Local Communities) के लिए एक अभिशाप बन गया है। खनन से होने वाली आय का बहुत कम हिस्सा इन गाँवों के विकास पर खर्च होता है, जबकि नुकसान उन्हें पूरी तरह झेलना पड़ता है। हमें एक ऐसी सतत विकास नीति (Sustainable Development Policy) की आवश्यकता है जो लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता दे। अरावली के संरक्षण के बिना इन गाँवों का अस्तित्व बचाए रखना एक बड़ी चुनौती है।