हरियाणा के मानचित्र (Map of Haryana) को देखने पर अरावली का विस्तार मुख्य रूप से इसके दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में स्पष्ट नजर आता है। गुरुग्राम (Gurugram), फरीदाबाद (Faridabad), मेवात (Nuh), रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ वे प्रमुख जिले हैं जहाँ अरावली की पहाड़ियाँ स्थित हैं। मानचित्र (Map) पर ये पहाड़ियाँ छोटी श्रृंखलाओं और खंडित टीलों के रूप में दिखाई देती हैं। हरियाणा का यह हिस्सा राजस्थान की अरावली श्रृंखला का ही उत्तरी विस्तार (Northern Extension) है जो दिल्ली की ओर बढ़ता है।
गुरुग्राम और फरीदाबाद के मानचित्र (Map) में अरावली रिज का क्षेत्र शहरी आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण 'ग्रीन फेफड़े' (Green Lung) की तरह अंकित है। यहाँ की पहाड़ियाँ वन्यजीवों (Wildlife) के लिए एक सुरक्षित गलियारा प्रदान करती हैं, जो नक्शे पर जंगलों के रूप में गहरे हरे रंग से दर्शाया जाता है। हालांकि, मानचित्र (Map) यह भी दिखाता है कि बढ़ते शहरीकरण (Urbanization) के कारण इन पहाड़ियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इन क्षेत्रों का संरक्षण (Conservation) करना हरियाणा की पारिस्थितिकी के लिए अनिवार्य है।
महेंद्रगढ़ जिले के मानचित्र (Map) में अरावली की पहाड़ियाँ काफी पथरीली और खनिजों से भरपूर दिखाई देती हैं। यहाँ 'ढोसी की पहाड़ी' (Dhosi Hill) एक प्रसिद्ध मृत ज्वालामुखी (Extinct Volcano) स्थल है जो मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक केंद्र के रूप में अंकित है। यह पहाड़ी हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर स्थित है और अपनी विशिष्ट भूगर्भीय संरचना (Geological Structure) के लिए जानी जाती है। मानचित्र (Map) में इस तरह के स्थल क्षेत्र की विविधता को उजागर करते हैं।
रेवाड़ी और नूँह (Mewat) के मानचित्र (Map) में अरावली की श्रृंखलाएँ वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के लिए प्राकृतिक आधार प्रदान करती हैं। यहाँ की घाटियों और ढलानों को नक्शे पर जलभृतों (Aquifers) के पुनर्भरण क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया जाता है। यदि इन पहाड़ियों का संरक्षण नहीं किया गया, तो इन जिलों में जल स्तर (Water Level) तेजी से गिर सकता है। मानचित्र (Map) का सही विश्लेषण प्रशासन को जल प्रबंधन (Water Management) की बेहतर योजना बनाने में मदद करता है।
हरियाणा के नक्शे (Map) पर अरावली की उपस्थिति यह याद दिलाती है कि यह राज्य केवल समतल मैदान नहीं है। यहाँ की पहाड़ियाँ सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि (Environmental View) से अत्यंत समृद्ध हैं। मानचित्र (Map) पर इन क्षेत्रों को 'इको-सेंसिटिव जोन' के रूप में सुरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। अरावली का यह हरियाणा वाला हिस्सा उत्तर भारत के जलवायु संतुलन (Climate Balance) में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।