मथुरा और वृंदावन (Mathura and Vrindavan) की होली अपनी सांस्कृतिक जड़ों के लिए विश्व विख्यात है, जहाँ 'रसिया' (Rasiya) गीतों का विशेष महत्व है। ये लोक गीत भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी (Lord Krishna and Radha) के प्रेम प्रसंगों पर आधारित होते हैं। ब्रज के गाँवों में ढोलक और मंजीरे (Cymbals) की थाप पर गाए जाने वाले ये गीत भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम हैं। रसिया गायन (Rasiya Singing) की परंपरा सदियों पुरानी है और आज भी उतनी ही जीवंत है।
"आज बिरज में होरी रे रसिया" (Aaj Biraj Mein Hori Re Rasiya) सबसे पवित्र और प्रसिद्ध लोक गीतों (Folk Songs) में से एक है। इस गीत के माध्यम से ब्रज की गलियों में होने वाली होली का सजीव चित्रण (Vivid Description) किया जाता है। गाँवों की चौपालों पर जब बुजुर्ग और युवा मिलकर इसे गाते हैं, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक (Spiritual) हो जाता है। यह संगीत संस्कृति (Culture) को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करता है।
होली के दौरान 'फाग' (Phag) गायन की भी एक लंबी परंपरा रही है, जिसमें प्रकृति के सौंदर्य और वसंत ऋतु (Spring Season) का वर्णन होता है। इन गीतों में टेसू के फूलों और अबीर-गुलाल (Abeer-Gulaal) की वर्षा का उल्लेख मिलता है। ग्रामीण अंचलों में महिलाएँ टोलियाँ बनाकर पारंपरिक वेशभूषा (Traditional Attire) में ये लोक गीत गाती हैं। यह सामुदायिक गायन (Community Singing) आपसी एकता और प्रेम को मज़बूत करता है।
शास्त्रीय संगीत (Classical Music) में भी होली का विशेष स्थान है, जहाँ 'धमार' और 'ठुमरी' (Thumri) विधाओं में होली के पद गाए जाते हैं। महान संगीतकारों ने राग 'काफी' और 'खमाज' में होली की बंदिशें (Compositions) रची हैं। यह गायन शैली अत्यंत परिष्कृत (Sophisticated) होती है और सुनने वालों के मन में भक्ति भाव जागृत करती है। शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए यह आध्यात्मिक तृप्ति (Spiritual Satisfaction) का समय होता है।
लोक गीतों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये हमारी क्षेत्रीय पहचान (Regional Identity) को दर्शाते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के हर जिले में होली के अलग-अलग स्थानीय गीत (Local Songs) प्रचलित हैं। ये गीत माटी की खुशबू और लोक जीवन (Folk Life) की सरलता को समेटे हुए हैं। परंपराओं का यह संगीत ही वास्तव में भारतीय त्योहारों (Indian Festivals) की असली आत्मा है।