ठंडाई होली के जश्न का आधिकारिक पेय (Official drink) है, जो सूखे मेवों और मसालों के अनूठे मिश्रण से तैयार की जाती है। इसे बनाने के लिए बादाम, काजू, पिस्ता, मगज (Melon seeds) और खसखस को कुछ घंटों के लिए भिगोया जाता है। इन सामग्रियों को काली मिर्च, सौंफ और हरी इलायची के साथ बारीक पीसकर एक पेस्ट (Paste) तैयार किया जाता है। ठंडे दूध में इस मिश्रण को घोलकर चीनी और केसर (Saffron) मिलाने से शाही स्वाद प्राप्त होता है।
ठंडाई का मुख्य लाभ (Benefit) इसकी तासीर है, जो गर्मी के मौसम में शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करती है। इसमें मौजूद काली मिर्च (Black pepper) और सौंफ पाचन में सहायक होते हैं, जबकि सूखे मेवे ऊर्जा (Energy) का भरपूर स्रोत प्रदान करते हैं। होली के हुड़दंग और रंगों के खेल के बीच एक गिलास ठंडाई शरीर की थकान को तुरंत दूर कर देती है। यह एक संपूर्ण ऊर्जा पेय (Energy drink) की तरह काम करता है।
बाजार में मिलने वाले सिरप (Syrup) की तुलना में घर पर पिसी हुई ताजी ठंडाई का स्वाद और गुणवत्ता (Quality) कहीं अधिक होती है। आप इसमें गुलाब की ताजी पंखुड़ियाँ (Rose petals) भी मिला सकते हैं, जो इसे एक बेहतरीन खुशबू (Aroma) प्रदान करती हैं। दूध को उबालकर ठंडा करने के बाद इस मिश्रण को मिलाना चाहिए और परोसने से पहले इसे फ्रिज में अच्छी तरह ठंडा करना चाहिए।
होली की पार्टी (Holi party) में ठंडाई को मिट्टी के कुल्हड़ में परोसना एक पारंपरिक अहसास देता है। इसे और अधिक समृद्ध (Rich) बनाने के लिए ऊपर से चांदी का वर्क या बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डाले जा सकते हैं। कई लोग इसमें ठंडक के लिए गुलकंद (Gulkand) का भी उपयोग करते हैं, जो इसके स्वाद को और भी गहरा बनाता है। यह पेय भारतीय आतिथ्य सत्कार (Hospitality) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
आयुर्वेद के अनुसार, ठंडाई में इस्तेमाल होने वाले मसाले रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाने में भी मददगार होते हैं। यह बिना किसी कृत्रिम रंग (Artificial color) या प्रिजर्वेटिव के तैयार की जाने वाली एक शुद्ध देसी ड्रिंक है। होली की दोपहर में रंगों से सने चेहरों के बीच जब ठंडी-ठंडी ठंडाई का दौर चलता है, तो उत्सव का आनंद चरम पर पहुँच जाता है।