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दही भल्ले होली के मेनू (Menu) में एक अत्यंत लोकप्रिय चाट व्यंजन (Chaat dish) है, जो अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। भल्ले बनाने के लिए उरद की दाल (Urad dal) को पीसकर उसमें थोड़ा नमक और अदरक मिलाकर अच्छी तरह फेंटा जाता है। फेंटने से दाल में हवा भर जाती है जिससे भल्ले तेल में डालने पर गुब्बारे की तरह फूलते हैं। इन्हें सुनहरा होने तक तलना चाहिए और फिर गुनगुने पानी (Lukewarm water) में भिगोकर रखना चाहिए।

भल्लों को परोसने से पहले दही (Curd) को अच्छी तरह मथकर उसमें थोड़ी चीनी मिला लेनी चाहिए ताकि वह क्रीमी और गाढ़ा (Creamy and thick) हो जाए। पानी से हल्के हाथों से निचोड़कर भल्लों को दही में पूरी तरह डुबो दें। दही की ठंडी परत और दाल के वड़ों की नरमी का तालमेल मुँह में जाते ही घुल जाने वाला अनुभव (Experience) देता है।

सजावट या गार्निशिंग (Garnishing) ही दही भल्ले की असली पहचान है, जिसके लिए इमली की खट्टी-मीठी चटनी और पुदीने की हरी चटनी (Green chutney) का प्रयोग किया जाता है। ऊपर से भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च और चाट मसाला छिड़कने से स्वाद और भी बढ़ जाता है। यदि आप इसमें अनार के दाने (Pomegranate seeds) और बारीक सेव मिलाते हैं, तो यह दिखने में किसी रेस्तरां की डिश जैसा लगता है।

होली के दिन घर आए मेहमानों को झटपट कुछ खिलाना हो, तो दही भल्ले एक बेहतरीन विकल्प (Option) हैं क्योंकि इन्हें पहले से बनाकर रखा जा सकता है। आप दाल के वड़ों को पहले से तलकर रख सकते हैं और मेहमानों के आने पर उन्हें दही के साथ असेंबल (Assemble) कर सकते हैं। यह समय की बचत करने वाला और सबको पसंद आने वाला नाश्ता (Snack) है।

दही भल्ले के साथ कई लोग उबले हुए आलू या पापड़ी (Crispy wafer) भी मिलाना पसंद करते हैं, जिसे 'दही वड़ा चाट' कहा जाता है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (Probiotics) पाचन को अच्छा रखते हैं, जो त्योहार के भारी खान-पान के बीच संतुलित आहार का काम करता है। रंगों के इस पर्व पर ठंडा और जायकेदार (Flavorful) दही भल्ला परोसकर आप अपने उत्सव को और भी खास बना सकते हैं।

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दही भल्ले होली के मेनू (Menu) में एक अत्यंत लोकप्रिय चाट व्यंजन (Chaat dish) है, जो अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। भल्ले बनाने के लिए उरद की दाल (Urad dal) को पीसकर उसमें थोड़ा नमक और अदरक मिलाकर अच्छी तरह फेंटा जाता है। फेंटने से दाल में हवा भर जाती है जिससे भल्ले तेल में डालने पर गुब्बारे की तरह फूलते हैं। इन्हें सुनहरा होने तक तलना चाहिए और फिर गुनगुने पानी (Lukewarm water) में भिगोकर रखना चाहिए।

भल्लों को परोसने से पहले दही (Curd) को अच्छी तरह मथकर उसमें थोड़ी चीनी मिला लेनी चाहिए ताकि वह क्रीमी और गाढ़ा (Creamy and thick) हो जाए। पानी से हल्के हाथों से निचोड़कर भल्लों को दही में पूरी तरह डुबो दें। दही की ठंडी परत और दाल के वड़ों की नरमी का तालमेल मुँह में जाते ही घुल जाने वाला अनुभव (Experience) देता है।

सजावट या गार्निशिंग (Garnishing) ही दही भल्ले की असली पहचान है, जिसके लिए इमली की खट्टी-मीठी चटनी और पुदीने की हरी चटनी (Green chutney) का प्रयोग किया जाता है। ऊपर से भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च और चाट मसाला छिड़कने से स्वाद और भी बढ़ जाता है। यदि आप इसमें अनार के दाने (Pomegranate seeds) और बारीक सेव मिलाते हैं, तो यह दिखने में किसी रेस्तरां की डिश जैसा लगता है।

होली के दिन घर आए मेहमानों को झटपट कुछ खिलाना हो, तो दही भल्ले एक बेहतरीन विकल्प (Option) हैं क्योंकि इन्हें पहले से बनाकर रखा जा सकता है। आप दाल के वड़ों को पहले से तलकर रख सकते हैं और मेहमानों के आने पर उन्हें दही के साथ असेंबल (Assemble) कर सकते हैं। यह समय की बचत करने वाला और सबको पसंद आने वाला नाश्ता (Snack) है।

दही भल्ले के साथ कई लोग उबले हुए आलू या पापड़ी (Crispy wafer) भी मिलाना पसंद करते हैं, जिसे 'दही वड़ा चाट' कहा जाता है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (Probiotics) पाचन को अच्छा रखते हैं, जो त्योहार के भारी खान-पान के बीच संतुलित आहार का काम करता है। रंगों के इस पर्व पर ठंडा और जायकेदार (Flavorful) दही भल्ला परोसकर आप अपने उत्सव को और भी खास बना सकते हैं।
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