चंद्रकला मिठाई अपनी बनावट में काफी हद तक गुजिया जैसी होती है, लेकिन इसका गोल आकार और जटिल कलाकारी (Intricate design) इसे विशेष बनाती है। इसके बाहरी आवरण के लिए मैदा, घी का मोयन और हल्का ठंडा पानी चाहिए ताकि परत खस्ता (Flaky) बने। भरावन या स्टफिंग (Stuffing) के लिए ताजा मावा, सूखा नारियल, चिरौंजी और कुटी हुई काली मिर्च का मिश्रण तैयार किया जाता है। यह मसालों और मिठास का मेल इसे एक अनोखा स्वाद (Unique taste) प्रदान करता है।
दो पूरियों के बीच भरावन रखकर किनारों को हाथ से गूंथना या फोल्ड करना सबसे कलात्मक हिस्सा है। इस गूंथने की प्रक्रिया (Pleating process) को सावधानी से करना चाहिए ताकि तलते समय मिठाई खुले नहीं। यदि आप हाथ से डिजाइन नहीं बना पा रहे हैं, तो सांचे (Molds) का भी उपयोग किया जा सकता है। किनारों पर थोड़ा पानी लगाने से वे मजबूती से चिपक जाते हैं। यह कलात्मक मिठाई (Artistic sweet) देखने में जितनी सुंदर है, खाने में उतनी ही स्वादिष्ट होती है।
तलते समय इस बात का ध्यान रखें कि तेल या घी बहुत अधिक गर्म न हो। धीमी आंच (Slow flame) पर धीरे-धीरे तलने से चंद्रकला के अंदर तक की परतें पक जाती हैं और वह लंबे समय तक कुरकुरी बनी रहती है। सुनहरा भूरा (Golden brown) होने तक तलना ही इसकी सही पहचान है। तलने के बाद इसे अतिरिक्त तेल सोखने वाले कागज़ पर निकाल लेना चाहिए। सही तापमान का नियंत्रण (Temperature control) ही इस रेसिपी की सफलता की कुंजी है।
चाशनी में डुबोने के बाद इसे गुलाब की पंखुड़ियों (Rose petals) से सजाना बहुत आकर्षक लगता है। चंद्रकला को अक्सर 'गुजिया' के शाही विकल्प के रूप में देखा जाता है क्योंकि इसमें चाशनी की एक अतिरिक्त परत होती है। यह मिठाई विशेष रूप से उन लोगों को पसंद आती है जिन्हें अधिक मीठा और रसीला भोजन (Juicy food) प्रिय है। होली के उपहार (Gifts) के रूप में भी चंद्रकला पैक करके देना एक बहुत अच्छा विचार है।
इसे सुरक्षित रखने के लिए हमेशा हवा बंद डिब्बे (Airtight container) का उपयोग करें ताकि नमी के कारण यह नरम न पड़े। ताजे बने मावे का उपयोग करने से इसकी शेल्फ लाइफ (Shelf life) बढ़ जाती है। होली के रंगों के बीच जब आप यह क्रिस्पी मिठाई परोसते हैं, तो यह उत्सव की चमक को और बढ़ा देती है। घर पर बनी चंद्रकला आपकी पाक कला (Culinary skills) का बेहतरीन प्रदर्शन करती है।