उत्तर भारत में मकर संक्रांति को मुख्य रूप से 'खिचड़ी' के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस दिन इस विशेष भोजन का बहुत महत्व है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, खिचड़ी में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक सामग्री का संबंध किसी न किसी ग्रह (Planet) से होता है। चावल को चंद्रमा का, काली उड़द की दाल को शनि देव (Lord Shani) का और हल्दी को गुरु ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इन सबका मिश्रण जीवन में ग्रहों के संतुलन (Balance of Planets) को दर्शाता है।
इस दिन काली उड़द की दाल (Black Gram) का दान करना विशेष रूप से शनि की साढ़े साती और ढैया के कुप्रभावों को कम करने के लिए किया जाता है। माना जाता है कि शनि देव इस दान से प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को कर्मों के अनुसार उचित फल (Appropriate Results) प्रदान करते हैं। दान के साथ-साथ भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की आराधना करना भी फलदायी होता है। यह रस्म धर्म और ज्योतिष के गहरे अंतर्संबंधों को उजागर करती है।
खिचड़ी में घी और मौसमी सब्जियां (Seasonal Vegetables) मिलाने से यह एक पूर्ण और संतुलित आहार (Balanced Diet) बन जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में काली दाल का सेवन शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है। दान के रूप में दी गई खिचड़ी किसी भूखे का पेट भरती है, जो हिंदू दर्शन (Hindu Philosophy) के अनुसार सबसे बड़ा पुण्य है। भोजन का यह दान हमें विनम्रता और परोपकार (Benevolence) की शिक्षा देता है।
कई समुदायों में इस दिन 'खिचड़ी मिलन' (Khichdi Meet) का आयोजन किया जाता है जहाँ जाति और धर्म के भेदभाव को भुलाकर सभी एक साथ भोजन करते हैं। यह सामाजिक समरसता (Social Equality) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहाँ भोजन के माध्यम से एकता का संदेश फैलाया जाता है। सात्विक भोजन (Sattvic Food) का सेवन मन को शांत और विचारों को शुद्ध रखने में मदद करता है। यह रस्म सामूहिक शांति (Collective Peace) का मार्ग प्रशस्त करती है।
खिचड़ी के साथ मूली, पापड़ और अचार (Pickle and Wafer) का सेवन इस दिन की विशेषता है। यह रस्म हमें अपनी जड़ों और खेती की मिट्टी (Soil of Farming) से जोड़ती है। त्यौहारों के माध्यम से हम अपने पूर्वजों की उन परंपराओं का सम्मान करते हैं जिन्होंने स्वास्थ्य और धर्म को एक सूत्र में पिरोया था। मकर संक्रांति की यह रस्म हमें आध्यात्मिक और शारीरिक (Spiritual and Physical) रूप से मजबूत बनाती है।