आयुर्वेद (Ayurveda) में खिचड़ी को 'त्रिदोष नाशक' आहार माना गया है, जो वात, पित्त और कफ (Vata, Pitta, and Kapha) को संतुलित करती है। खिचड़ी एक अत्यंत सुपाच्य (Easy to Digest) भोजन है, जो पेट की समस्याओं से राहत दिलाता है। मकर संक्रांति के समय जब ऋतु परिवर्तन (Seasonal Transition) होता है, तब शरीर की पाचन शक्ति (Digestive Power) को स्थिर रखने के लिए खिचड़ी का सेवन सर्वोत्तम है। यह शरीर को शुद्ध करने (Detoxification) का एक प्राकृतिक तरीका है।
चावल और मूंग या उड़द दाल का मिश्रण शरीर को सभी आवश्यक अमीनो एसिड (Essential Amino Acids) प्रदान करता है। यह एक संपूर्ण प्रोटीन (Complete Protein) का स्रोत है, जो मांसपेशियों की मरम्मत और विकास के लिए जरूरी है। खिचड़ी में डाली जाने वाली हल्दी एक बेहतरीन एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) तत्व है, जो शरीर के दर्द और सूजन को कम करती है। अदरक और काली मिर्च पाचन रसों (Digestive Juices) को सक्रिय करते हैं।
खिचड़ी वजन नियंत्रित (Weight Control) करने में भी सहायक होती है क्योंकि यह लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास कराती है। इसमें फाइबर (Fiber) की अच्छी मात्रा होती है, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए भी बिना पॉलिश वाले चावल (Unpolished Rice) की खिचड़ी एक सुरक्षित विकल्प हो सकती है। यह भोजन रक्त शर्करा (Blood Sugar) को अचानक बढ़ने से रोकता है।
घी (Ghee) का उपयोग खिचड़ी के गुणों को कई गुना बढ़ा देता है, क्योंकि यह विटामिन ए, डी और ई (Vitamins A, D, and E) के अवशोषण में मदद करता है। घी मानसिक स्पष्टता और स्मरण शक्ति (Memory Power) को भी बेहतर बनाता है। सर्दियों में घी का सेवन जोड़ों के लचीलेपन (Joint Flexibility) के लिए बहुत जरूरी है। इस प्रकार खिचड़ी केवल एक धार्मिक भोजन नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक आहार (Scientific Diet) भी है।
आजकल के आधुनिक समय में लोग खिचड़ी को एक सुपरफूड (Superfood) के रूप में देख रहे हैं। इसमें पोषक तत्वों का ऐसा संतुलन है जो बहुत कम व्यंजनों में मिलता है। खिचड़ी पर्व पर इसे खाने की परंपरा वास्तव में हमारे पूर्वजों द्वारा स्वास्थ्य की देखभाल (Health Care) के लिए बनाया गया एक नियम है। सात्विक और ताजा भोजन (Fresh Food) मन को भी शांत और प्रसन्न रखता है।