शहरों में रहने वाले लोग अक्सर अपनी छत या बालकनी को सूर्य पोंगल के लिए एक पवित्र स्थल (Sacred Space) में बदल देते हैं। छत की सफाई करके वहां गेरू और चावल के आटे से बड़ी रंगोली (Large Rangoli) बनाना उत्सव की शुरुआत है। सजावट के लिए गेंदे के फूलों की माला (Marigold Garlands) और आम के पत्तों (Mango Leaves) का उपयोग करना वातावरण को पारंपरिक और शुद्ध बनाता है। यह प्राकृतिक सजावट (Natural Decoration) मन को शांति और प्रसन्नता प्रदान करती है।
पूजा स्थल के चारों ओर गन्ने के ऊँचे डंठल (Tall Sugarcane) बांधकर एक छोटा सा मंडप (Mandap) बनाया जा सकता है। मिट्टी के चूल्हे (Mud Stove) को रंगीन चित्रों और कुमकुम से सजाने से वह बहुत आकर्षक लगता है। कई लोग पीतल के लैंप (Brass Lamps) और दीयों का प्रयोग करते हैं जो सूर्य की रोशनी में और भी चमकते हैं। यह सजावट आपके घर को एक पारंपरिक गाँव (Traditional Village) जैसा रूप दे देती है।
छत पर सजावट करते समय 'केले के पौधों' (Banana Plants) का उपयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है। रंग-बिरंगे कपड़ों या दुपट्टों से एक अस्थाई छाया (Temporary Shade) बनाना भी एक अच्छा विचार है। छोटे मिट्टी के बर्तनों में अनाज और दालें (Grains and Pulses) भरकर रखना समृद्धि का प्रदर्शन करता है। यह रचनात्मकता आपकी भक्ति और त्यौहार के प्रति आपके उत्साह (Enthusiasm) को दर्शाती है।
आजकल आधुनिक लाइटों (Modern Lights) और लालटेन का उपयोग भी शाम के समय छत की शोभा बढ़ाने के लिए किया जाता है। फूलों की पंखुड़ियों से बनाई गई कोलम (Flower Kolam) देखने में बहुत भव्य लगती है। छत पर सामूहिक रूप से पोंगल पकाने की व्यवस्था करना पड़ोसियों के साथ जुड़ाव (Social Bonding) बढ़ाने का एक तरीका है। यह सजावट त्यौहार के हर पल को यादगार और सुंदर बना देती है।
सजावट का मुख्य उद्देश्य सूर्य देव का स्वागत करना और प्रकृति की सुंदरता (Beauty of Nature) को निहारना है। जब आप अपनी छत को इस तरह सजाते हैं, तो वह केवल एक स्थान नहीं बल्कि एक दिव्य वेदी (Divine Altar) बन जाती है। पोंगल की यह चमक और हरियाली आपके जीवन में नई उमंग (New Zeal) भर देती है। परिवार के साथ ऐसी सुंदर जगह पर समय बिताना रिश्तों में मिठास घोलने का काम करता है।