भारतीय पंचांग (Indian Calendar) के अनुसार वर्ष 2026 में पोंगल का मुख्य उत्सव 15 जनवरी से शुरू होकर 18 जनवरी तक मनाया जाएगा। पोंगल की गणना सूर्य के मकर राशि (Capricorn Zodiac) में प्रवेश के आधार पर की जाती है, जिसे मकर संक्रांति (Makar Sankranti) भी कहा जाता है। इस वर्ष सूर्य का गोचर 14 जनवरी की देर रात होने के कारण मुख्य पूजा 15 जनवरी को की जाएगी। यह समय सौर चक्र (Solar Cycle) में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक माना जाता है।
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timing) की बात करें तो सूर्य पोंगल के दिन सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है। विद्वानों के अनुसार सुबह 7:30 से 9:00 बजे के बीच का समय 'थाई' (Thai) महीने के स्वागत के लिए श्रेष्ठ है। इस दौरान ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurta) में स्नान करके सूर्य देव की आराधना करना फलदायी होता है। पोंगल की रस्मों के लिए सही समय का पालन करना परिवार में शांति और समृद्धि (Peace and Prosperity) सुनिश्चित करता है।
तिथियों का निर्धारण खगोलीय गणना (Astronomical Calculation) और ग्रहों की स्थिति के आधार पर किया जाता है। 15 जनवरी को 'थाई पोंगल' (Thai Pongal) का मुख्य दिन होगा, जब घरों में नए चावल उबाले जाएंगे। इसके ठीक एक दिन पहले 14 जनवरी को भोगी (Bhogi) मनाया जाएगा, जो पुरानी वस्तुओं के त्याग का दिन है। तिथियों का यह क्रम दक्षिण भारतीय संस्कृति (South Indian Culture) की प्राचीन परंपराओं के अनुसार व्यवस्थित होता है।
माट्टु पोंगल (Mattu Pongal) की तिथि 16 जनवरी 2026 निर्धारित है, जो पशुधन (Livestock) के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन है। इसके पश्चात 17 जनवरी को काणम पोंगल (Kaanum Pongal) मनाया जाएगा, जो पारिवारिक मिलन के लिए जाना जाता है। कुछ क्षेत्रों में स्थानीय गणना के अनुसार तिथियों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन व्यापक रूप से यही समय सीमा (Time Frame) मान्य होगी। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे पंचांग के अनुसार ही अपनी पूजा की योजना बनाएं।
समय और तिथियों का यह विज्ञान (Science of Dates) हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है। पोंगल का आगमन सर्दियों के अंत और वसंत के स्वागत का संकेत है, जब दिन धीरे-धीरे लंबे होने लगते हैं। उत्तरायण (Uttarayana) की शुरुआत के साथ ही देवताओं का दिन आरंभ होता है, जो आध्यात्मिक साधना (Spiritual Practice) के लिए भी उत्तम है। पोंगल की ये तारीखें हमारे जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता (Positive Energy) लेकर आती हैं।