सामान्यतः पोंगल की तिथि 14 या 15 जनवरी के आसपास ही रहती है, लेकिन कभी-कभी ग्रहों की चाल (Planetary Movements) के कारण इसमें बदलाव संभव है। सौर कैलेंडर (Solar Calendar) और चंद्र कैलेंडर (Lunar Calendar) के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए ज्योतिषीय गणना में मामूली सुधार किए जाते हैं। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश का सटीक समय ही पोंगल की मुख्य तिथि (Main Date of Pongal) निर्धारित करता है। यदि प्रवेश अर्धरात्रि के बाद होता है, तो उत्सव अगले दिन मनाया जाता है।
अधिक मास (Leap Month) और नक्षत्रों की स्थिति भी कभी-कभी त्यौहार की तारीखों को प्रभावित कर सकती है। पंचांग के अनुसार गणना करने वाले विद्वान (Astrological Scholars) सटीक समय निकालने के लिए जटिल गणितीय सूत्रों का उपयोग करते हैं। पोंगल की तिथि का निर्धारण वैश्विक स्तर पर समय क्षेत्रों (Time Zones) के आधार पर भी थोड़ा भिन्न हो सकता है। यह वैज्ञानिक सटीकता पोंगल को एक विश्वसनीय और गणनात्मक पर्व (Calculative Festival) बनाती है।
ऐतिहासिक रूप से पोंगल की तारीख हमेशा उत्तरायण के प्रारंभ से जुड़ी रही है। पुराने समय में जब सटीक घड़ियाँ नहीं थीं, तब लोग सूर्य की छाया (Shadow of Sun) और तारों की स्थिति देखकर तिथियों का अनुमान लगाते थे। आज आधुनिक खगोल विज्ञान (Modern Astronomy) ने इन तारीखों की पुष्टि और भी सटीकता से कर दी है। तिथि में किसी भी प्रकार का बदलाव हमेशा ब्रह्मांडीय नियमों (Cosmic Laws) के अधीन होता है।
भक्तों को हमेशा स्थानीय मंदिर के पंचांग या विश्वसनीय ज्योतिषीय वेबसाइट (Astrological Websites) से तिथि की पुष्टि करनी चाहिए। तारीखों में बदलाव का अर्थ है कि प्रकृति के चक्र में एक नया मोड़ आया है। पोंगल की तिथि का स्थिर रहना सूर्य की स्थिरता और हमारी सांस्कृतिक दृढ़ता (Cultural Steadfastness) का प्रतीक है। यह त्यौहार समय की निरंतरता और जीवन के प्रवाह (Flow of Life) को दर्शाता है।
निश्चित तिथियों का पालन करने से पूरे समुदाय में एकरूपता (Uniformity) आती है और लोग सामूहिक रूप से उत्सव मना पाते हैं। पोंगल की तारीख हमें यह भी बताती है कि मानव जीवन और ब्रह्मांड (Human Life and Universe) एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। तिथि चाहे जो भी हो, पोंगल की भावना हमेशा खुशी, त्याग और कृतज्ञता से भरी रहती है। समय के साथ पोंगल की इन तारीखों का महत्व और भी बढ़ता जा रहा है।