माघ बिहू, जिसे भोगाली बिहू (Bhogali Bihu) भी कहा जाता है, मुख्य रूप से फसल कटाई का उत्सव है। इस पर्व की सबसे अनूठी परंपरा मेजी और भेलाघर का निर्माण है। भेलाघर (Bhelaghar) बांस, पत्तों और सूखी घास से बनी एक अस्थायी संरचना (Temporary Structure) होती है, जहाँ लोग उत्सव की रात रुकते हैं और सामूहिक भोज (Community Feast) का आनंद लेते हैं। यह संरचना किसानों के कठिन परिश्रम और फसल की सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
उत्सव की अगली सुबह, पवित्र स्नान के बाद मेजी (Meji) को जलाया जाता है। मेजी अग्नि देव (Fire God) को समर्पित एक ऊँचा ढांचा होता है, जिसे जलाकर लोग अपनी पुरानी बुराइयों और नकारात्मकता (Negativity) को भस्म करने की प्रार्थना करते हैं। जलती हुई मेजी की राख को खेतों में फैलाया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इससे मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) बढ़ती है। यह दृश्य आध्यात्मिक शुद्धि और नई शुरुआत (New Beginning) का संदेश देता है।
मेजी के चारों ओर लोग इकट्ठा होकर मंत्रोच्चार करते हैं और अग्नि में तिल, गुड़ और चावल (Sesame, Jaggery and Rice) की आहुति देते हैं। यह क्रिया प्रकृति के प्रति कृतज्ञता (Gratitude toward Nature) प्रकट करने का एक तरीका है। भेलाघर के भीतर रात भर चलने वाला संगीत और नृत्य सामाजिक एकता (Social Unity) को मज़बूत करता है। गाँवों में मेजी का आकार जितना बड़ा होता है, उतना ही अधिक गौरव उस समुदाय का माना जाता है।
इन संरचनाओं का निर्माण पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्री (Natural Materials) से किया जाता है, जो पर्यावरण के साथ मनुष्य के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। मेजी जलाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि सर्दियों की विदाई और गर्म दिनों के स्वागत (Welcoming Warm Days) का प्रतीक है। अग्नि की लपटें शांति और समृद्धि (Peace and Prosperity) का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यह परंपरा असमिया संस्कृति की पहचान और उसके गौरवशाली अतीत (Glorious Past) का हिस्सा है।
आजकल शहरों में भी लोग प्रतीकात्मक मेजी (Symbolic Meji) जलाकर इस परंपरा को जीवित रख रहे हैं। भेलाघर के भीतर परोसा जाने वाला भोजन आपसी प्रेम और भाईचारे (Brotherhood) को बढ़ावा देता है। उत्सव समाप्त होने के बाद इन अस्थायी घरों को जला देना यह सिखाता है कि जीवन नश्वर है और हमें हर पल का आनंद लेना चाहिए। माघ बिहू की यह रस्म हमें अपनी जड़ों और मिट्टी (Roots and Soil) से जोड़े रखती है।