भोगाली बिहू का नाम 'भोग' (Bhog) शब्द से आया है, जिसका अर्थ है खाना और आनंद लेना। इस समय असमिया रसोई में विभिन्न प्रकार के पीठा (Pitha) तैयार किए जाते हैं, जो चावल के आटे से बनी एक विशेष मिठाई होती है। 'तिल पीठा' (Til Pitha) और 'घिला पीठा' (Ghila Pitha) इस त्यौहार के मुख्य आकर्षण होते हैं। इन व्यंजनों में नए चावल की खुशबू और गुड़ की मिठास (Sweetness of Jaggery) उत्सव के आनंद को दोगुना कर देती है।
पकवानों में 'लारू' (Laru) का भी विशेष स्थान है, जो नारियल और तिल (Coconut and Sesame) के लड्डू होते हैं। इन्हें बनाना एक सामूहिक गतिविधि है, जहाँ घर की महिलाएं एक साथ बैठकर इन मिठाइयों को आकार देती हैं। 'दोई-चीरा' (Doi-Chira) यानी दही और चूड़ा का मिश्रण सुबह के नाश्ते के रूप में खाया जाता है। यह आहार न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य (Health and Nutrition) के लिए भी बहुत लाभदायक माना जाता है।
माघ बिहू की रात को 'उरुका' (Uruka) कहा जाता है, जिसमें मछली और मांस (Fish and Meat) के साथ एक भव्य प्रीतिभोज का आयोजन होता है। 'मछली का पिटिका' और 'लोकल चिकन करी' (Local Chicken Curry) जैसे व्यंजन मिट्टी के बर्तनों में पकाए जाते हैं। ताजी कटी हुई सब्जियों और मसालों का उपयोग भोजन को एक विशिष्ट सुगंध (Distinct Aroma) प्रदान करता है। यह भोजन परिवार और समुदाय के बीच खुशियाँ साझा करने का माध्यम है।
पीठा बनाने के लिए 'बोरा चावल' (Bora Rice) का उपयोग किया जाता है, जो अपनी चिपचिपाहट के लिए प्रसिद्ध है। इसे बांस की नलियों में भरकर 'चुंगा पीठा' (Sunga Pitha) भी बनाया जाता है, जो एक प्राचीन पाक तकनीक (Ancient Culinary Technique) है। इन पकवानों का स्वाद चखने के लिए दूर-दराज से लोग असम पहुँचते हैं। यह व्यंजन आधारित पर्यटन (Food Tourism) राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सहारा देता है।
मिठाइयों के अलावा, खट्टे और तीखे स्वाद वाले व्यंजन भी मेज की शोभा बढ़ाते हैं। 'खार' (Khar) जैसे पारंपरिक क्षारीय व्यंजन पाचन क्रिया (Digestion) में मदद करते हैं। भोजन परोसने के लिए पीतल के बर्तनों (Bell Metal Utensils) का उपयोग करना एक सांस्कृतिक मर्यादा (Cultural Decorum) मानी जाती है। भोगाली बिहू वास्तव में स्वादों का एक महाकुंभ है, जहाँ हर निवाला प्रेम और परंपरा (Love and Tradition) से भरा होता है।