घर पर सरस्वती पूजा का आयोजन करने के लिए सबसे पहले उत्तर या पूर्व दिशा में एक साफ चौकी (Wooden Platform) स्थापित करनी चाहिए। उस पर पीला या सफेद रेशमी कपड़ा बिछाकर माँ सरस्वती की सुंदर प्रतिमा (Statue of Goddess) या चित्र रखें। भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले करें क्योंकि वे विघ्नहर्ता (Remover of Obstacles) हैं और उनके बिना कोई भी शुभ कार्य पूरा नहीं होता। पूजा स्थल को गेंदे के पीले फूलों और आम के पत्तों (Mango Leaves and Marigold Flowers) से सजाना अत्यंत मांगलिक माना जाता है।
देवी को अर्पित करने के लिए पीले चंदन, अक्षत और सफेद सुगंधित फूलों (Fragrant White Flowers) का उपयोग करें। माँ सरस्वती को पीले रंग की वस्तुएं प्रिय हैं, इसलिए उन्हें पीले वस्त्र और आभूषण (Yellow Clothes and Jewelry) पहनाना शुभ होता है। धूप, दीप और अगरबत्ती जलाकर वातावरण को सुगंधित और भक्तिमय बनाएं। पूजा की थाली में गंगाजल और ताजी मिठाइयां (Fresh Sweets) अवश्य रखें ताकि देवी को भोग लगाया जा सके।
विशेष रूप से विद्यार्थियों को अपनी पुस्तकें और वाद्य यंत्र (Books and Musical Instruments) देवी की प्रतिमा के पास रखने चाहिए। यह क्रिया दर्शाती है कि हम अपनी विद्या को देवी के चरणों में समर्पित (Dedicated to Goddess) कर रहे हैं। पूजा के दौरान सरस्वती स्तोत्र या वंदना (Saraswati Vandana) का सस्वर पाठ करना चाहिए जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। तांबे के कलश (Copper Kalash) में जल भरकर उस पर नारियल रखना भी समृद्धि का प्रतीक है।
भोग के रूप में केसरिया भात, पीले फल जैसे केला और बेर (Yellow Fruits and Saffron Rice) अर्पित करने की परंपरा है। कई परिवारों में इस दिन विशेष रूप से 'खिचड़ी' और 'लाबड़ा' (Traditional Assamese/Bengali Dish) बनाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। प्रसाद ग्रहण करने से पहले देवी की कपूर से आरती (Aarti with Camphor) करें और शंख बजाएं। यह ध्वनि तरंगें मन को शांत करती हैं और घर की नकारात्मकता को नष्ट करती हैं।
सजावट के लिए आप प्राकृतिक रंगों से बनी रंगोली (Rangoli with Natural Colors) का प्रयोग कर सकते हैं। वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी की मूर्तियों (Clay Idols) का चलन बढ़ा है, जो बहुत ही सराहनीय है। घर के दरवाजों पर बंदनवार और दीवारों पर माँ सरस्वती के मंत्रों के पोस्टर (Posters of Mantras) लगाकर आप उत्सव का माहौल बना सकते हैं। यह सरल पूजा विधि परिवार के सभी सदस्यों को भक्ति और ज्ञान के सूत्र (Thread of Knowledge) में बांध देती है।