वसंत पंचमी पर बहुत से श्रद्धालु व्रत (Fast) रखते हैं, जिसके लिए फलाहार (Fruits-based Diet) का चयन बहुत सावधानी से किया जाता है। व्रत के भोजन में अनाज का प्रयोग वर्जित होता है, इसलिए कुट्टू का आटा या सिंघाड़े का आटा (Kuttu or Water Chestnut Flour) मुख्य आधार बनता है। इससे बनी पूरियां या परांठे ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसके साथ ही दही वाले आलू (Potato with Curd) की सब्जी बनाई जाती है जिसमें सेंधा नमक (Rock Salt) का प्रयोग किया जाता है, जो व्रत के लिए शुद्ध माना जाता है।
फलों में मुख्य रूप से बेर (Jujube/Ber) का इस दिन विशेष महत्व है, क्योंकि इसे माँ सरस्वती को अर्पित करने के बाद ही खाने की परंपरा है। इसके अलावा पीले फल जैसे केला, पपीता और संतरा (Papaya, Banana and Orange) विटामिन और खनिजों की पूर्ति करते हैं। साबूदाना खिचड़ी या वड़ा (Sabudana Khichdi or Vada) भी एक लोकप्रिय फलाहार है जो हल्का और पचाने में आसान होता है। मखाने की खीर (Foxnut Pudding) जिसे केसर और मेवा डालकर बनाया जाता है, व्रत में मिठास और संतुष्टि प्रदान करती है।
पेय पदार्थों में 'केसरिया लस्सी' या 'ठंडाई' (Saffron Lassi or Thandai) का सेवन शरीर को शीतलता और शक्ति देता है। बहुत से लोग 'बादाम का दूध' (Almond Milk) भी पसंद करते हैं जो मानसिक एकाग्रता (Mental Concentration) बढ़ाने में सहायक होता है। व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है, इसलिए नारियल पानी (Coconut Water) एक अच्छा विकल्प है। यह फलाहार न केवल शरीर को शुद्ध करता है बल्कि आध्यात्मिक साधना (Spiritual Practice) के लिए मन को भी तैयार करता है।
व्रत का खाना बनाने के लिए 'मूंगफली का तेल' या 'शुद्ध घी' (Pure Ghee or Peanut Oil) का ही उपयोग किया जाना चाहिए। रसोई में 'एयर फ्रायर' (Air Fryer) का उपयोग करके कम तेल में भी स्वादिष्ट व्रत के व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। आजकल 'इंस्टेंट व्रत मिक्स' (Instant Vrat Mix) बाजार में उपलब्ध हैं जो समय की बचत करते हैं। फलाहार का यह संयमित भोजन व्यक्ति को अनुशासन और धैर्य (Discipline and Patience) की सीख देता है, जो विद्यार्थी जीवन के लिए भी अत्यंत आवश्यक गुण हैं।
अंततः, वसंत पंचमी का फलाहार हमें सादगी और सात्विकता (Simplicity and Sattva) की ओर ले जाता है। यह व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव है। फलाहार के सेवन से शरीर में भारीपन नहीं आता, जिससे पूजा और ध्यान (Meditation and Puja) में मन अधिक लगता है। यह परंपरा हमें स्वस्थ जीवनशैली और आध्यात्मिक शांति (Healthy Lifestyle and Spiritual Peace) का मार्ग दिखाती है।