भारतीय संविधान सभा (Constituent Assembly) ने 26 नवंबर 1949 को औपचारिक रूप से भारत के संविधान (Constitution of India) को अपनाया था। इस ऐतिहासिक दिन की याद में और नागरिकों के बीच संवैधानिक मूल्यों (Constitutional Values) को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 2015 में इस दिन को संविधान दिवस के रूप में घोषित किया।
यह दिन डॉ. बी.आर. अंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) के अमूल्य योगदान को सम्मानित करने का एक तरीका है, जिन्होंने मसौदा समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। संविधान दिवस हमें लोकतंत्र (Democracy) के महत्व और उन अधिकारों की याद दिलाता है जो हमें एक स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक के रूप में प्राप्त हैं।
संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में पढ़ना इस दिन की मुख्य परंपरा है। यह अभ्यास हमें न्याय (Justice), स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality) और बंधुत्व (Fraternity) के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए इन सिद्धांतों को समझना अनिवार्य है।
इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में क्विज़ और भाषण प्रतियोगिताओं (Competitions) का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को हमारे बुनियादी कानूनों (Fundamental Laws) के बारे में शिक्षित करना है। यह दिन शासन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) की भावना को भी पुख्ता करता है।
अंततः, यह दिवस भारत के एक संप्रभु (Sovereign), समाजवादी (Socialist), धर्मनिरपेक्ष (Secular) और लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic) बनने की यात्रा का उत्सव है। यह हमें याद दिलाता है कि कानून की सर्वोच्चता (Supremacy of Law) ही समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने का एकमात्र आधार है।