भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान (Lengthiest Written Constitution) है। इसे तैयार करने में संविधान सभा को कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था। इस दौरान सभा के सदस्यों ने विभिन्न देशों के संविधानों का गहन अध्ययन किया ताकि भारत के लिए एक आदर्श ढांचा तैयार किया जा सके।
संविधान निर्माण की इस व्यापक प्रक्रिया (Process) के दौरान कुल 166 बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में समाज के हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए गंभीर चर्चा और बहस (Debates) की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी अवधि इसलिए लगी क्योंकि भारत की विविधता (Diversity) को एक सूत्र में पिरोना एक बड़ी चुनौती थी।
वित्तीय दृष्टिकोण (Financial Perspective) से देखा जाए तो उस समय संविधान के निर्माण पर लगभग 64 लाख रुपये का खर्च आया था। इस बजट का उपयोग मुद्रण, बैठकों के आयोजन और शोध कार्यों (Research Work) के लिए किया गया था। यह राशि उस कालखंड के अनुसार काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
संविधान सभा में 299 सदस्य शामिल थे, जिन्होंने विभिन्न प्रांतों और रियासतों (Princely States) का प्रतिनिधित्व किया। इन विद्वानों ने अथक परिश्रम करके एक ऐसा दस्तावेज तैयार किया जो आज भी देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। उनकी दूरदर्शिता (Foresight) का ही परिणाम है कि हमारा संविधान आज भी प्रासंगिक है।
यह हस्तलिखित (Handwritten) दस्तावेज है जिसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने सुलेख (Calligraphy) के माध्यम से लिखा था। प्रत्येक पृष्ठ को शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा सजाया गया था। यह तथ्य दर्शाता है कि संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं बल्कि हमारी कला और संस्कृति का भी प्रतिबिंब है।