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गणतंत्र दिवस परेड में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां (Tableaux) भारत की विविधता (Diversity) को दर्शाती हैं। इन झांकियों का चयन रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) करती है। इस समिति में कला, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

चयन की प्रक्रिया (Selection Process) कई चरणों में पूरी होती है, जिसमें राज्यों को अपने प्रस्तावित मॉडल (Proposed Models) और स्केच पेश करने होते हैं। समिति मुख्य रूप से विषय वस्तु (Theme), विजुअल अपील (Visual Appeal) और संगीत के समन्वय पर ध्यान देती है। हर साल एक विशेष मुख्य विषय (Central Theme) भी निर्धारित किया जाता है।

झांकियों के निर्माण में पर्यावरण अनुकूल सामग्री (Eco-friendly Material) के उपयोग पर जोर दिया जाता है। प्रत्येक राज्य अपनी लोक कला (Folk Art), ऐतिहासिक स्मारकों और आधुनिक उपलब्धियों (Achievements) को प्रदर्शित करने का प्रयास करता है। चयन प्रक्रिया के दौरान यह भी देखा जाता है कि झांकी का डिजाइन तकनीकी रूप से सुरक्षित (Technically Safe) है या नहीं।

सीमित समय के कारण हर साल सभी राज्यों की झांकियों को परेड में शामिल करना संभव नहीं होता है, इसलिए रोटेशन प्रणाली (Rotation System) अपनाई जाती है। जो झांकियां बेहतरीन प्रदर्शन (Best Performance) करती हैं, उन्हें समारोह के अंत में पुरस्कृत (Awarded) भी किया जाता है। इससे राज्यों के बीच अपनी संस्कृति को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

ये झांकियां न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों की अनूठी पहचान (Unique Identity) से लोगों को परिचित कराती हैं। रक्षा मंत्रालय यह सुनिश्चित करता है कि झांकियों के माध्यम से 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' (Ek Bharat Shreshtha Bharat) का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचे। यह पूरे आयोजन का सबसे रंगीन और आकर्षक (Attractive) हिस्सा होता है।

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गणतंत्र दिवस परेड में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां (Tableaux) भारत की विविधता (Diversity) को दर्शाती हैं। इन झांकियों का चयन रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) करती है। इस समिति में कला, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

चयन की प्रक्रिया (Selection Process) कई चरणों में पूरी होती है, जिसमें राज्यों को अपने प्रस्तावित मॉडल (Proposed Models) और स्केच पेश करने होते हैं। समिति मुख्य रूप से विषय वस्तु (Theme), विजुअल अपील (Visual Appeal) और संगीत के समन्वय पर ध्यान देती है। हर साल एक विशेष मुख्य विषय (Central Theme) भी निर्धारित किया जाता है।

झांकियों के निर्माण में पर्यावरण अनुकूल सामग्री (Eco-friendly Material) के उपयोग पर जोर दिया जाता है। प्रत्येक राज्य अपनी लोक कला (Folk Art), ऐतिहासिक स्मारकों और आधुनिक उपलब्धियों (Achievements) को प्रदर्शित करने का प्रयास करता है। चयन प्रक्रिया के दौरान यह भी देखा जाता है कि झांकी का डिजाइन तकनीकी रूप से सुरक्षित (Technically Safe) है या नहीं।

सीमित समय के कारण हर साल सभी राज्यों की झांकियों को परेड में शामिल करना संभव नहीं होता है, इसलिए रोटेशन प्रणाली (Rotation System) अपनाई जाती है। जो झांकियां बेहतरीन प्रदर्शन (Best Performance) करती हैं, उन्हें समारोह के अंत में पुरस्कृत (Awarded) भी किया जाता है। इससे राज्यों के बीच अपनी संस्कृति को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

ये झांकियां न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों की अनूठी पहचान (Unique Identity) से लोगों को परिचित कराती हैं। रक्षा मंत्रालय यह सुनिश्चित करता है कि झांकियों के माध्यम से 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' (Ek Bharat Shreshtha Bharat) का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचे। यह पूरे आयोजन का सबसे रंगीन और आकर्षक (Attractive) हिस्सा होता है।
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