परेड का सबसे रोमांचक हिस्सा भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) द्वारा किया जाने वाला फ्लाईपास्ट (Flypast) होता है। इसमें राफेल (Rafale), सुखोई-30 (Sukhoi-30) और जगुआर (Jaguar) जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान (Fighter Jets) अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। आसमान में इन विमानों की गड़गड़ाहट और उनके करतब दर्शकों में देशभक्ति (Patriotism) का संचार करते हैं।
विभिन्न संरचनाओं (Formations) में उड़ान भरते समय पायलट अपनी सटीकता (Precision) और कौशल का परिचय देते हैं। 'एकलव्य' और 'त्रिशूल' जैसी फॉर्मेशन (Formations) विशेष रूप से लोकप्रिय हैं, जहाँ विमान हवा में कलाबाजी करते हुए भारतीय तिरंगा (National Flag) बनाने का प्रयास करते हैं। यह वायु सेना की परिचालन तत्परता (Operational Readiness) का प्रमाण है।
विमानों के साथ-साथ उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopters) और परिवहन विमान (Transport Aircraft) भी इस फ्लाईपास्ट का हिस्सा बनते हैं। मेड इन इंडिया (Made in India) के तहत विकसित किए गए 'तेजस' (Tejas) विमानों की भागीदारी आत्मनिर्भर भारत (Self-reliant India) की बढ़ती ताकत को दिखाती है। फ्लाईपास्ट का समापन अक्सर 'वर्टिकल चारली' (Vertical Charlie) पैंतरे के साथ होता है।
मौसम की स्थिति (Weather Conditions) फ्लाईपास्ट के सफल आयोजन में एक महत्वपूर्ण कारक होती है। कोहरे और कम दृश्यता (Low Visibility) की चुनौतियों के बावजूद, वायु सेना के जांबाज पायलट तकनीक और अनुभव के तालमेल से इसे सफलतापूर्वक संपन्न करते हैं। यह प्रदर्शन विदेशी मेहमानों (Foreign Guests) के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
फ्लाईपास्ट केवल एक हवाई प्रदर्शन (Air Display) नहीं है, बल्कि यह हमारे आकाश की सुरक्षा करने वाले योद्धाओं को सलाम करने का एक जरिया है। इसकी योजना (Planning) और अभ्यास कई महीनों पहले से शुरू कर दिया जाता है ताकि मुख्य दिन पर कोई त्रुटि न हो। यह भारतीय आकाश में अदम्य साहस (Indomitable Courage) की एक अद्भुत गाथा लिखता है।