राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में सुरक्षा के इंतजाम (Security Arrangements) बेहद कड़े और बहुस्तरीय (Multi-layered) होते हैं। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के हजारों जवानों के साथ अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की टुकड़ियाँ पूरे कर्तव्य पथ (Kartavya Path) और आसपास के इलाकों को अपनी निगरानी में ले लेती हैं। सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे (Potential Threat) को रोकना और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
परेड स्थल पर प्रवेश के लिए चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे (Facial Recognition Cameras) और अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीनों (Scanning Machines) का उपयोग किया जाता है। आकाश में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए 'नो फ्लाई ज़ोन' (No Fly Zone) लागू किया जाता है और ड्रोन रोधी प्रणालियाँ (Anti-drone Systems) तैनात रहती हैं। स्निपर (Snipers) और कमांडो ऊंची इमारतों पर तैनात रहकर चप्पे-चप्पे पर नजर रखते हैं।
यातायात प्रबंधन (Traffic Management) के लिए विशेष निर्देश जारी किए जाते हैं ताकि वीआईपी आवाजाही (VIP Movement) और आम जनता को कोई असुविधा न हो। दिल्ली के बॉर्डर्स पर वाहनों की सघन चेकिंग (Intensive Checking) की जाती है और संदिग्ध वस्तुओं की पहचान के लिए डॉग स्क्वायड (Dog Squad) की मदद ली जाती है। यह एक जटिल ऑपरेशन है जिसमें खुफिया एजेंसियां (Intelligence Agencies) निरंतर समन्वय करती हैं।
आपातकालीन स्थितियों (Emergency Situations) से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमें (Quick Reaction Teams) और मेडिकल पोस्ट जगह-जगह स्थापित की जाती हैं। दर्शकों को केवल वैध डिजिटल टिकट (Digital Ticket) या पास के साथ ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है। मोबाइल जैमर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरणों (Electronic Security Equipment) का भी व्यापक स्तर पर प्रयोग किया जाता है।
परेड के सुचारू संचालन के लिए रिहर्सल (Rehearsal) के दिनों से ही सुरक्षा प्रोटोकॉल (Security Protocol) सक्रिय हो जाते हैं। कर्तव्य पथ (Kartavya Path) की यह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भारत की रक्षा तैयारियों और अनुशासन (Discipline) का प्रदर्शन करती है। सुरक्षा बलों का अटूट समर्पण ही इस राष्ट्रीय पर्व को निर्विघ्न संपन्न कराने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।