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तेजस (Tejas) एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान (Multirole Fighter Jet) है जिसे पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह दुनिया के सबसे छोटे और हल्के सुपरसोनिक (Supersonic) लड़ाकू विमानों में से एक है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम है। इसकी बनावट में कार्बन कंपोजिट (Carbon Composites) का उपयोग किया गया है, जिससे यह रडार की नजर से बचने में अधिक सफल होता है।

वायु सेना में तेजस के शामिल होने से पुराने हो चुके विमानों को बदलने की प्रक्रिया (Replacement Process) तेज हुई है। इसमें उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (Electronic Warfare) सुइट और डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम लगा हुआ है। तेजस की चपलता और हवा में ईंधन भरने (Air-to-Air Refuelling) की क्षमता इसे लंबी दूरी के अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है। यह विमान आधुनिक इजरायली रडार (Israeli Radar) और मिसाइल प्रणालियों से लैस है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने तेजस के विभिन्न संस्करणों जैसे मार्क 1 और मार्क 1ए का उत्पादन शुरू किया है। ये विमान नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर (Network Centric Warfare) की अवधारणा पर आधारित हैं, जिससे ये युद्ध के मैदान में अन्य इकाइयों के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा कर सकते हैं। इसके स्वदेशी इंजन और एवियोनिक्स (Avionics) भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती प्रदान करते हैं।

प्रदर्शनी के दौरान तेजस द्वारा किए जाने वाले वर्टिकल लूप (Vertical Loop) और कोबरा पैंतरे इसकी उत्कृष्ट एरोबेटिक क्षमता (Aerobatic Capability) को दर्शाते हैं। यह विमान न केवल रक्षा के लिए बल्कि निर्यात (Export) के नजरिए से भी भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। स्वदेशी तकनीक होने के कारण इसके सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को भारतीय जरूरतों के अनुसार आसानी से अपग्रेड (Upgrade) किया जा सकता है।

आने वाले समय में तेजस भारतीय वायु सेना के बेड़े की रीढ़ (Backbone) बनने के लिए तैयार है। यह एक साथ कई लक्ष्यों (Multiple Targets) पर नजर रख सकता है और उन्हें नष्ट कर सकता है। इसकी कम परिचालन लागत (Operational Cost) और उच्च उपलब्धता दर इसे एक किफायती लेकिन घातक हथियार बनाती है।

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तेजस (Tejas) एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान (Multirole Fighter Jet) है जिसे पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह दुनिया के सबसे छोटे और हल्के सुपरसोनिक (Supersonic) लड़ाकू विमानों में से एक है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम है। इसकी बनावट में कार्बन कंपोजिट (Carbon Composites) का उपयोग किया गया है, जिससे यह रडार की नजर से बचने में अधिक सफल होता है।

वायु सेना में तेजस के शामिल होने से पुराने हो चुके विमानों को बदलने की प्रक्रिया (Replacement Process) तेज हुई है। इसमें उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (Electronic Warfare) सुइट और डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम लगा हुआ है। तेजस की चपलता और हवा में ईंधन भरने (Air-to-Air Refuelling) की क्षमता इसे लंबी दूरी के अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है। यह विमान आधुनिक इजरायली रडार (Israeli Radar) और मिसाइल प्रणालियों से लैस है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने तेजस के विभिन्न संस्करणों जैसे मार्क 1 और मार्क 1ए का उत्पादन शुरू किया है। ये विमान नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर (Network Centric Warfare) की अवधारणा पर आधारित हैं, जिससे ये युद्ध के मैदान में अन्य इकाइयों के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा कर सकते हैं। इसके स्वदेशी इंजन और एवियोनिक्स (Avionics) भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती प्रदान करते हैं।

प्रदर्शनी के दौरान तेजस द्वारा किए जाने वाले वर्टिकल लूप (Vertical Loop) और कोबरा पैंतरे इसकी उत्कृष्ट एरोबेटिक क्षमता (Aerobatic Capability) को दर्शाते हैं। यह विमान न केवल रक्षा के लिए बल्कि निर्यात (Export) के नजरिए से भी भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। स्वदेशी तकनीक होने के कारण इसके सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को भारतीय जरूरतों के अनुसार आसानी से अपग्रेड (Upgrade) किया जा सकता है।

आने वाले समय में तेजस भारतीय वायु सेना के बेड़े की रीढ़ (Backbone) बनने के लिए तैयार है। यह एक साथ कई लक्ष्यों (Multiple Targets) पर नजर रख सकता है और उन्हें नष्ट कर सकता है। इसकी कम परिचालन लागत (Operational Cost) और उच्च उपलब्धता दर इसे एक किफायती लेकिन घातक हथियार बनाती है।
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