परेड के समापन के बाद सर्वश्रेष्ठ झांकी का चयन करने के लिए एक अलग निर्णायक मंडल (Jury) बनाया जाता है। यह मंडल झांकी के विभिन्न पहलुओं जैसे रचनात्मकता (Creativity), विषयवस्तु की स्पष्टता और प्रस्तुति के आधार पर अंक (Marks) देता है। पुरस्कार जीतने के लिए झांकी का न केवल सुंदर होना जरूरी है, बल्कि उसका एक सार्थक संदेश (Meaningful Message) देना भी अनिवार्य है।
निर्णायक मंडल यह देखता है कि झांकी ने अपने राज्य की संस्कृति (Culture) या मंत्रालय की उपलब्धियों को कितनी सटीकता से दर्शाया है। झांकी की फिनिशिंग (Finishing) और विवरणों पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि बारीक काम अक्सर निर्णायक मंडल को प्रभावित करता है। इसके अलावा झांकी के साथ चल रहे कलाकारों के अनुशासन (Discipline) और प्रदर्शन को भी जांचा जाता है।
पुरस्कारों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों (Categories) में बांटा जाता है: राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां और मंत्रालयों/विभागों की झांकियां। हाल के वर्षों में 'पीपल्स चॉइस' (People's Choice) श्रेणी भी शुरू की गई है, जिसमें आम जनता 'माई गॉव' (MyGov) पोर्टल के माध्यम से अपनी पसंदीदा झांकी को वोट (Vote) दे सकती है। इससे दर्शकों की भागीदारी (Participation) और अधिक बढ़ गई है।
विजेता झांकी की घोषणा परेड के कुछ दिनों बाद की जाती है और संबंधित राज्य के प्रतिनिधियों को एक भव्य समारोह में ट्रॉफी (Trophy) प्रदान की जाती है। यह पुरस्कार राज्यों के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि (Proud Achievement) मानी जाती है। इससे भविष्य की झांकियों के लिए गुणवत्ता और नवाचार (Innovation) के नए मानक स्थापित होते हैं।
चयन समिति यह भी मूल्यांकन करती है कि झांकी ने राष्ट्रीय एकता (National Integration) के विचार को कितनी मजबूती से पेश किया है। जो झांकियां पारंपरिक शिल्प (Traditional Craft) को नई तकनीक के साथ जोड़ती हैं, उनके जीतने की संभावना अधिक होती है। यह पुरस्कार न केवल राज्य का सम्मान बढ़ाता है बल्कि उन गुमनाम कलाकारों की मेहनत को भी पहचान दिलाता है जिन्होंने इसे बनाया है।