राज्यों के अलावा विभिन्न केंद्रीय मंत्रालय (Central Ministries) भी अपनी झांकियों के माध्यम से देश की प्रगति और विकास योजनाओं (Development Schemes) का प्रदर्शन करते हैं। इन झांकियों का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों और भविष्य के लक्ष्यों (Future Goals) से जनता को अवगत कराना होता है। उदाहरण के तौर पर कृषि मंत्रालय अपनी झांकी में आधुनिक खेती और खाद्य सुरक्षा (Food Security) को दर्शाता है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इसरो (ISRO) जैसी संस्थाएं अपनी झांकियों में मिसाइलों और अंतरिक्ष मिशनों (Space Missions) के मॉडल पेश करती हैं। यह प्रदर्शन भारत की वैज्ञानिक शक्ति (Scientific Might) और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) का प्रतीक होता है। ये झांकियां युवाओं में विज्ञान और अनुसंधान के प्रति रुचि पैदा करने का एक प्रभावी माध्यम हैं।
मंत्रालयों की झांकियों में अक्सर डेटा और ग्राफिक्स (Graphics) का उपयोग किया जाता है ताकि उपलब्धियों को सांख्यिकीय रूप से भी दिखाया जा सके। डिजिटल इंडिया (Digital India) और स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियानों को झांकियों के जरिए बहुत ही सृजनात्मक (Creative) ढंग से पेश किया गया है। इनमें अक्सर उन लाभार्थियों (Beneficiaries) की कहानियों को भी शामिल किया जाता है जिनके जीवन में सरकारी योजनाओं से बदलाव आया है।
मंत्रालयों के लिए अपनी झांकी तैयार करना एक रणनीतिक संचार (Strategic Communication) का हिस्सा होता है। वे सुनिश्चित करते हैं कि झांकी की विषयवस्तु वैश्विक दर्शकों (Global Audience) को भी प्रभावित करे, क्योंकि गणतंत्र दिवस परेड का प्रसारण पूरी दुनिया में होता है। यह झांकियां विदेशी मेहमानों के सामने भारत की बढ़ती आर्थिक और सामाजिक ताकत (Socio-economic Strength) को प्रदर्शित करती हैं।
संस्कृति मंत्रालय की झांकियां अक्सर भारत की गौरवशाली विरासत और महान महापुरुषों के जीवन पर आधारित होती हैं। मंत्रालयों की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि परेड केवल एक सांस्कृतिक उत्सव न रहकर राष्ट्र निर्माण (Nation Building) की एक व्यापक तस्वीर बन जाए। इन झांकियों के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच एक सीधा संवाद (Direct Dialogue) स्थापित होता है।