स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर ध्वजारोहण (Flag Hoisting) किया जाता है, जिसमें झंडे को नीचे से रस्सी खींचकर ऊपर ले जाया जाता है। यह प्रक्रिया 'ध्वजारोहण' कहलाती है, जो औपनिवेशिक शासन (Colonial Rule) से मुक्ति और एक नए स्वतंत्र राष्ट्र के उदय का प्रतीक है। इसे अंग्रेजी में 'Hoisting' कहा जाता है।
इसके विपरीत, गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा 'फहराया' (Unfurling) जाता है। चूँकि भारत 26 जनवरी 1950 को पहले से ही एक स्वतंत्र राष्ट्र था, इसलिए इस दिन झंडा स्तंभ के शीर्ष (Top of Pole) पर बंधा रहता है और उसे केवल खोलकर फहराया जाता है। इसे अंग्रेजी शब्दावली में 'Unfurling' कहा जाता है।
संवैधानिक मर्यादा (Constitutional Decorum) के अनुसार, प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख (Head of Government) होते हैं, इसलिए वे स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम का नेतृत्व करते हैं। राष्ट्रपति राष्ट्र के प्रमुख (Head of State) होते हैं, अतः गणतंत्र दिवस जैसे संवैधानिक पर्व पर उनके द्वारा झंडा फहराया जाना अनिवार्य (Mandatory) है।
स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) का कार्यक्रम मुख्य रूप से लाल किले (Red Fort) की प्राचीर से होता है, जहाँ से प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं। गणतंत्र दिवस का समारोह कर्तव्य पथ (Kartavya Path) पर आयोजित होता है, जहाँ देश की सैन्य शक्ति (Military Might) और सांस्कृतिक झांकियों का प्रदर्शन किया जाता है।
ये दोनों ही प्रक्रियाएं भारत की लोकतांत्रिक यात्रा (Democratic Journey) के अलग-अलग चरणों को दर्शाती हैं। ध्वजारोहण जहाँ संघर्ष और विजय (Victory) की याद दिलाता है, वहीं झंडा फहराना संविधान की सर्वोच्चता और गणराज्य की स्थिरता (Stability) का उत्सव है। इन बारीकियों को समझना नागरिक जागरूकता (Civic Awareness) के लिए आवश्यक है।