जब गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि (Chief Guest) भारत पहुँचते हैं, तो उनका स्वागत राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) के प्रांगण में एक भव्य औपचारिक समारोह के साथ किया जाता है। उन्हें 21 तोपों की सलामी (21-gun Salute) दी जाती है और सशस्त्र बलों द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' (Guard of Honour) प्रदान किया जाता है। यह सम्मान किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के लिए सर्वोच्च स्तर का सत्कार माना जाता है जो भारत की मेहमाननवाजी (Hospitality) को दर्शाता है।
परेड वाले दिन, मुख्य अतिथि राष्ट्रपति के काफिले (Convoy) का हिस्सा बनते हैं और उनके साथ ही कर्तव्य पथ (Kartavya Path) पर पहुँचते हैं। उनके बैठने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ विशेष दीर्घा (Enclosure) बनाई जाती है। सुरक्षा की दृष्टि से अतिथि के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा घेरा (Security Ring) होता है, जिसमें भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ उनके अपने देश के सुरक्षाकर्मी भी शामिल होते हैं।
प्रोटोकॉल (Protocol) के अनुसार, मुख्य अतिथि को भारत की सांस्कृतिक विरासत और सैन्य उपलब्धियों (Military Achievements) का विस्तृत विवरण दिया जाता है। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा आयोजित राजकीय भोज (State Banquet) में विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है, जहाँ वे देश के शीर्ष नेतृत्व और गणमान्य हस्तियों से मुलाकात करते हैं। यह अवसर व्यक्तिगत संबंधों (Personal Relations) को प्रगाढ़ करने का एक बड़ा माध्यम होता है।
अतिथि की यात्रा के दौरान उन्हें राजघाट (Rajghat) ले जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम भी प्रोटोकॉल का हिस्सा है। भारत सरकार उनके प्रवास के दौरान हर छोटी-बड़ी सुविधा (Facilities) का ध्यान रखती है ताकि उन्हें भारत की गौरवशाली परंपराओं का अनुभव हो सके। यह राजकीय सत्कार (State Hospitality) विदेशी मेहमानों के मन में भारत के प्रति एक अमिट छाप छोड़ता है।
समारोह के समापन पर उन्हें ससम्मान विदाई दी जाती है, जो हमारे मैत्रीपूर्ण संबंधों (Friendly Relations) के नए अध्याय की शुरुआत होती है। इस पूरी व्यवस्था का संचालन प्रोटोकॉल विभाग (Protocol Department) द्वारा अत्यंत बारीकी से किया जाता है। यह भव्यता और अनुशासन (Discipline) भारत की प्रशासनिक कुशलता और अंतरराष्ट्रीय मर्यादा का परिचायक है।