महावीर चक्र (Maha Vir Chakra) युद्ध के दौरान वीरता के लिए दिया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा सम्मान है, जबकि कीर्ति चक्र (Kirti Chakra) शांति काल का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। इन सम्मानों के लिए नाम प्रस्तावित करने की जिम्मेदारी संबंधित सैन्य टुकड़ी (Military Unit) के कमांडिंग ऑफिसर की होती है। उनके द्वारा तैयार किए गए वीरता के विवरण (Citation) को मुख्यालय के माध्यम से रक्षा मंत्रालय को भेजा जाता है।
चयन प्रक्रिया (Selection Process) में साहस के उस कार्य का विस्तृत विवरण देखा जाता है जो कर्तव्य की सामान्य अपेक्षाओं से कहीं ऊपर हो। महावीर चक्र के मामले में दुश्मन की उपस्थिति में दिखाई गई बहादुरी (Bravery) मुख्य पैमाना होती है। कीर्ति चक्र के लिए चयन करते समय यह देखा जाता है कि व्यक्ति ने अपनी जान की परवाह किए बिना समाज या राष्ट्र के हित में कितना बड़ा जोखिम (Risk) उठाया।
रक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय समिति (High Level Committee) इन प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा करती है। इसमें सेना, नौसेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी (Senior Officers) शामिल होते हैं जो प्रत्येक मामले की निष्पक्षता से जांच करते हैं। अंतिम सूची तैयार होने के बाद इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और फिर राष्ट्रपति की स्वीकृति (Approval) के लिए भेजा जाता है।
विजेताओं के नामों की घोषणा साल में दो बार की जाती है—गणतंत्र दिवस (Republic Day) और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि केवल वास्तविक और योग्य व्यक्तियों (Deserving Individuals) को ही यह राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो। महावीर चक्र मुख्य रूप से सैनिकों को मिलता है, लेकिन कीर्ति चक्र के लिए पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) के जवान भी पात्र होते हैं।
राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) में आयोजित एक भव्य अलंकरण समारोह (Investiture Ceremony) में राष्ट्रपति स्वयं ये पदक प्रदान करते हैं। यदि वीरता का कार्य करते समय सैनिक शहीद हो गया हो, तो यह सम्मान उनके निकटतम संबंधी (Next of Kin) ग्रहण करते हैं। चयन की यह पारदर्शी व्यवस्था भारतीय वीरता पुरस्कारों की विश्वसनीयता (Credibility) को वैश्विक स्तर पर बनाए रखती है।