भारतीय वीरता पुरस्कारों के पदकों का डिजाइन (Design) हमारी प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक गौरव को प्रतिबिंबित करता है। परमवीर चक्र (Param Vir Chakra) के पदक पर ऋषि दधीचि के 'वज्र' (Vajra) के चार चित्र बने हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, दधीचि ने राक्षसों के विनाश के लिए अपनी अस्थियां दान कर दी थीं, जो सर्वोच्च त्याग (Supreme Sacrifice) का प्रतीक है।
वीर चक्र (Vir Chakra) और अन्य पदकों के केंद्र में अशोक चक्र (Ashok Chakra) बना होता है, जो न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। पदकों के पीछे की तरफ हिंदी और अंग्रेजी (English) में पुरस्कार का नाम लिखा होता है और कमल के दो फूल बने होते हैं। कमल का फूल (Lotus Flower) पवित्रता और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी खिलने की क्षमता को दर्शाता है, जो एक सैनिक के चरित्र का गुण है।
इन पदकों के रिबन के रंगों (Ribbon Colors) का भी विशेष महत्व होता है, जैसे परमवीर चक्र का रिबन बैंगनी (Purple) रंग का होता है। कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र के रिबन में हरे रंग की धारियाँ होती हैं, जो शांति और समृद्धि (Prosperity) का प्रतिनिधित्व करती हैं। पदकों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली धातु, जैसे कांस्य (Bronze) या चांदी, उनकी श्रेणी और वरीयता को स्पष्ट करती है।
मूर्तिकार सावित्री खानोलकर (Savitri Khanolkar) ने इन पदकों के प्रारंभिक डिजाइन तैयार किए थे, जो भारतीय दर्शन और सैन्य परंपरा (Military Tradition) का अद्भुत संगम हैं। यह डिजाइन यह सुनिश्चित करते हैं कि पदक प्राप्त करने वाले योद्धा को न केवल अपनी बहादुरी पर बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) पर भी गर्व हो। पदक का प्रत्येक हिस्सा वीरता की एक कहानी कहता है।
समय के साथ इन पदकों की बनावट में मामूली बदलाव आए हैं, लेकिन उनके मूल प्रतीकों (Original Symbols) को सुरक्षित रखा गया है। जब कोई सैनिक अपनी वर्दी पर इन पदकों को सजाता है, तो वह भारत के गौरवशाली इतिहास (Glorious History) को अपने साथ लेकर चलता है। ये प्रतीक आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा और आत्म-अनुशासन (Self-discipline) की शिक्षा देते हैं।