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भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) जिसे हम आज तिरंगे के रूप में देखते हैं, उसका वर्तमान स्वरूप पिंगली वेंकैया (Pingali Venkayya) की कल्पना का परिणाम है। वेंकैया एक महान स्वतंत्रता सेनानी और कृषि वैज्ञानिक (Agricultural Scientist) थे, जिन्होंने झंडे के डिजाइन के लिए वर्षों तक शोध किया। उन्होंने विभिन्न देशों के झंडों का अध्ययन किया और 1921 में विजयवाड़ा सत्र के दौरान महात्मा गांधी को अपना पहला डिजाइन पेश किया।

प्रारंभिक डिजाइन (Initial Design) में केवल दो रंग थे—लाल और हरा, जो क्रमशः हिंदू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे। गांधी जी के सुझाव पर इसमें अन्य समुदायों और शांति के प्रतीक के रूप में सफेद पट्टी (White Stripe) को जोड़ा गया। इसके केंद्र में एक चरखा (Spinning Wheel) रखा गया था, जो आत्मनिर्भरता और स्वदेशी (Swadeshi) आंदोलन का संदेश देता था। यह झंडा लंबे समय तक स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान बना रहा।

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आधिकारिक स्वीकृति (Official Acceptance) दी। इस दौरान झंडे में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया—केंद्र में स्थित चरखे की जगह सम्राट अशोक के 'धर्म चक्र' (Dharma Chakra) को शामिल किया गया। इस चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं, जो समय की निरंतरता और प्रगति (Progress) को दर्शाती हैं। रंगों के अर्थ को भी व्यापक बनाया गया ताकि वे किसी विशेष समुदाय के बजाय मानवीय मूल्यों (Human Values) को दर्शाएं।

तिरंगे का केसरिया रंग साहस और बलिदान (Sacrifice) का प्रतीक है, सफेद रंग सत्य और शांति को दर्शाता है, जबकि हरा रंग खुशहाली और उर्वरता (Fertility) का सूचक है। पिंगली वेंकैया का यह योगदान राष्ट्र की एकता का सबसे बड़ा आधार स्तंभ बन गया। उनके द्वारा डिजाइन किया गया यह ध्वज (Flag) आज दुनिया के सबसे सुंदर और अर्थपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीकों में से एक माना जाता है जो हर भारतीय के स्वाभिमान को बढ़ाया है।

राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण के लिए खादी (Khadi) का उपयोग करना अनिवार्य बनाया गया, जो महात्मा गांधी के ग्रामोद्योग के विचारों से जुड़ा था। भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) इसके प्रदर्शन और सम्मान के लिए कड़े नियम निर्धारित करती है। पिंगली वेंकैया की कलात्मक दृष्टि ने भारत को एक ऐसी पहचान दी जिसने भौगोलिक और भाषाई सीमाओं से ऊपर उठकर सभी देशवासियों को एक सूत्र (Single Thread) में बांध दिया।

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भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) जिसे हम आज तिरंगे के रूप में देखते हैं, उसका वर्तमान स्वरूप पिंगली वेंकैया (Pingali Venkayya) की कल्पना का परिणाम है। वेंकैया एक महान स्वतंत्रता सेनानी और कृषि वैज्ञानिक (Agricultural Scientist) थे, जिन्होंने झंडे के डिजाइन के लिए वर्षों तक शोध किया। उन्होंने विभिन्न देशों के झंडों का अध्ययन किया और 1921 में विजयवाड़ा सत्र के दौरान महात्मा गांधी को अपना पहला डिजाइन पेश किया।

प्रारंभिक डिजाइन (Initial Design) में केवल दो रंग थे—लाल और हरा, जो क्रमशः हिंदू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे। गांधी जी के सुझाव पर इसमें अन्य समुदायों और शांति के प्रतीक के रूप में सफेद पट्टी (White Stripe) को जोड़ा गया। इसके केंद्र में एक चरखा (Spinning Wheel) रखा गया था, जो आत्मनिर्भरता और स्वदेशी (Swadeshi) आंदोलन का संदेश देता था। यह झंडा लंबे समय तक स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान बना रहा।

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आधिकारिक स्वीकृति (Official Acceptance) दी। इस दौरान झंडे में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया—केंद्र में स्थित चरखे की जगह सम्राट अशोक के 'धर्म चक्र' (Dharma Chakra) को शामिल किया गया। इस चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं, जो समय की निरंतरता और प्रगति (Progress) को दर्शाती हैं। रंगों के अर्थ को भी व्यापक बनाया गया ताकि वे किसी विशेष समुदाय के बजाय मानवीय मूल्यों (Human Values) को दर्शाएं।

तिरंगे का केसरिया रंग साहस और बलिदान (Sacrifice) का प्रतीक है, सफेद रंग सत्य और शांति को दर्शाता है, जबकि हरा रंग खुशहाली और उर्वरता (Fertility) का सूचक है। पिंगली वेंकैया का यह योगदान राष्ट्र की एकता का सबसे बड़ा आधार स्तंभ बन गया। उनके द्वारा डिजाइन किया गया यह ध्वज (Flag) आज दुनिया के सबसे सुंदर और अर्थपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीकों में से एक माना जाता है जो हर भारतीय के स्वाभिमान को बढ़ाया है।

राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण के लिए खादी (Khadi) का उपयोग करना अनिवार्य बनाया गया, जो महात्मा गांधी के ग्रामोद्योग के विचारों से जुड़ा था। भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) इसके प्रदर्शन और सम्मान के लिए कड़े नियम निर्धारित करती है। पिंगली वेंकैया की कलात्मक दृष्टि ने भारत को एक ऐसी पहचान दी जिसने भौगोलिक और भाषाई सीमाओं से ऊपर उठकर सभी देशवासियों को एक सूत्र (Single Thread) में बांध दिया।
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