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गणतंत्र दिवस पर हर साल उन साहसी बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार (National Bravery Awards) दिए जाते हैं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद की हो। इन बच्चों का चयन पूरे देश से किया जाता है और उनके निस्वार्थ कार्यों (Selfless Acts) को मान्यता दी जाती है। यह पुरस्कार बच्चों में साहस और समाज सेवा (Social Service) की भावना भरने के लिए शुरू किया गया था। इन वीर बच्चों को गणतंत्र दिवस की परेड (Republic Day Parade) में हाथी या खुली जीप पर बैठकर जनता का अभिवादन करते हुए देखा जा सकता है।

पुरस्कार विजेताओं के चयन की प्रक्रिया काफी कठिन होती है, जिसमें जिला और राज्य स्तर पर आवेदनों की जांच की जाती है। भारतीय बाल कल्याण परिषद (ICCW) और अब केंद्र सरकार स्वयं इन बच्चों के नामों की घोषणा करती है। इन बच्चों ने डूबते हुए लोगों को बचाने, आग से निकालने या अपराधियों का मुकाबला करने जैसे असाधारण कार्य (Extraordinary Tasks) किए होते हैं। उनकी बहादुरी की कहानियाँ पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।

पुरस्कार के रूप में बच्चों को एक पदक, प्रमाण पत्र (Certificate) और नकद राशि दी जाती है। इसके अलावा, सरकार इन बच्चों की उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति (Scholarship) भी प्रदान करती है। कई राज्यों में इन बच्चों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता भी दी जाती है। यह सम्मान केवल उन बच्चों के लिए नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और स्कूल के लिए भी गर्व की बात होती है।

परेड के दौरान जब इन नन्हे नायकों (Young Heroes) का नाम पुकारा जाता है, तो पूरा कर्तव्य पथ तालियों की गूँज से भर जाता है। उनकी आँखों में चमक और चेहरे पर आत्मविश्वास (Confidence) यह बताता है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। यह पुरस्कार बच्चों को यह सिखाता है कि वीरता केवल युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई जा सकती है। यह समाज में सकारात्मकता (Positivity) फैलाने का एक बेहतरीन जरिया है।

इन वीर बच्चों की गाथाएं समाचार पत्रों और टीवी चैनलों (TV Channels) के माध्यम से घर-घर पहुँचती हैं। कई बार इन पर फिल्में या नाटक भी बनाए जाते हैं ताकि समाज इनके बलिदान को याद रख सके। गणतंत्र दिवस का यह हिस्सा भावनात्मक रूप से बहुत शक्तिशाली होता है। यह हमें याद दिलाता है कि उम्र चाहे कितनी भी छोटी हो, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बड़ा काम किया जा सकता है। ये बच्चे वास्तव में हमारे गणतंत्र के असली गौरव (Real Pride) हैं।

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गणतंत्र दिवस पर हर साल उन साहसी बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार (National Bravery Awards) दिए जाते हैं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद की हो। इन बच्चों का चयन पूरे देश से किया जाता है और उनके निस्वार्थ कार्यों (Selfless Acts) को मान्यता दी जाती है। यह पुरस्कार बच्चों में साहस और समाज सेवा (Social Service) की भावना भरने के लिए शुरू किया गया था। इन वीर बच्चों को गणतंत्र दिवस की परेड (Republic Day Parade) में हाथी या खुली जीप पर बैठकर जनता का अभिवादन करते हुए देखा जा सकता है।

पुरस्कार विजेताओं के चयन की प्रक्रिया काफी कठिन होती है, जिसमें जिला और राज्य स्तर पर आवेदनों की जांच की जाती है। भारतीय बाल कल्याण परिषद (ICCW) और अब केंद्र सरकार स्वयं इन बच्चों के नामों की घोषणा करती है। इन बच्चों ने डूबते हुए लोगों को बचाने, आग से निकालने या अपराधियों का मुकाबला करने जैसे असाधारण कार्य (Extraordinary Tasks) किए होते हैं। उनकी बहादुरी की कहानियाँ पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।

पुरस्कार के रूप में बच्चों को एक पदक, प्रमाण पत्र (Certificate) और नकद राशि दी जाती है। इसके अलावा, सरकार इन बच्चों की उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति (Scholarship) भी प्रदान करती है। कई राज्यों में इन बच्चों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता भी दी जाती है। यह सम्मान केवल उन बच्चों के लिए नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और स्कूल के लिए भी गर्व की बात होती है।

परेड के दौरान जब इन नन्हे नायकों (Young Heroes) का नाम पुकारा जाता है, तो पूरा कर्तव्य पथ तालियों की गूँज से भर जाता है। उनकी आँखों में चमक और चेहरे पर आत्मविश्वास (Confidence) यह बताता है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। यह पुरस्कार बच्चों को यह सिखाता है कि वीरता केवल युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई जा सकती है। यह समाज में सकारात्मकता (Positivity) फैलाने का एक बेहतरीन जरिया है।

इन वीर बच्चों की गाथाएं समाचार पत्रों और टीवी चैनलों (TV Channels) के माध्यम से घर-घर पहुँचती हैं। कई बार इन पर फिल्में या नाटक भी बनाए जाते हैं ताकि समाज इनके बलिदान को याद रख सके। गणतंत्र दिवस का यह हिस्सा भावनात्मक रूप से बहुत शक्तिशाली होता है। यह हमें याद दिलाता है कि उम्र चाहे कितनी भी छोटी हो, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बड़ा काम किया जा सकता है। ये बच्चे वास्तव में हमारे गणतंत्र के असली गौरव (Real Pride) हैं।
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