लोसार (Losar) की पूर्व संध्या पर 'गुथुक' (Guthuk) नामक एक विशेष नूडल सूप (Noodle Soup) तैयार किया जाता है, जो इस त्यौहार का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह सूप नौ अलग-अलग सामग्रियों (Nine Ingredients) से बनाया जाता है, जिसमें मांस, पनीर और विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ शामिल होती हैं। 'गु' का अर्थ नौ होता है, जो तिब्बती संस्कृति में एक शुभ संख्या मानी जाती है। यह भोजन केवल शारीरिक पोषण नहीं, बल्कि एक मनोरंजक परंपरा (Entertaining Tradition) का भी हिस्सा है।
गुथुक (Guthuk) के भीतर आटे की छोटी गोलियां डाली जाती हैं, जिनमें छिपे हुए संकेत (Hidden Symbols) होते हैं। इन गोलियों के अंदर कोयला, ऊन, नमक या कागज के टुकड़े जैसे पदार्थ रखे जाते हैं। प्रत्येक पदार्थ व्यक्ति के स्वभाव या भविष्य (Future Predictions) के बारे में कुछ कहता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी को सफेद ऊन (White Wool) मिलता है, तो उसे दयालु माना जाता है, जबकि कोयला मिलने का अर्थ नकारात्मकता से जोड़ा जाता है।
यह रस्म परिवार के सदस्यों के बीच हँसी-मजाक और आनंद (Joy and Laughter) का माहौल पैदा करती है। सूप पीने के बाद, लोग बचे हुए आटे से बनी आकृतियों को घर से बाहर ले जाते हैं, जो पिछले वर्ष की सभी बाधाओं और बीमारियों (Obstacles and Illnesses) को दूर करने का प्रतीक है। यह सफाई प्रक्रिया मानसिक और शारीरिक शुद्धि (Mental and Physical Purification) के लिए की जाती है। इस प्रकार, गुथुक एक भोजन मात्र न रहकर एक आध्यात्मिक उपचार बन जाता है।
व्यंजन बनाने की विधि पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे बनाने में घर की महिलाएं मुख्य भूमिका निभाती हैं। ताजे मसालों और जड़ी-बूटियों (Herbs) का उपयोग सूप को औषधीय गुण भी प्रदान करता है। कड़ाके की ठंड में यह गर्मागर्म गुथुक शरीर को ऊर्जा और गर्मी (Warmth and Energy) देता है। लोसार के इस विशेष खान-पान के बिना नए साल का जश्न अधूरा माना जाता है।
भोजन के बाद सामूहिक रूप से प्रार्थना करना और परिवार के साथ समय बिताना इस परंपरा को पूर्णता प्रदान करता है। गुथुक (Guthuk) का यह स्वाद लोसार (Losar) की यादों को और भी मीठा बना देता है। यह परंपरा दिखाती है कि कैसे भोजन के माध्यम से हम अपने संस्कारों और सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) को जीवित रख सकते हैं। यह सूप खुशहाली और बेहतर कल की उम्मीद का परिचायक है।