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सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' (Guru Granth Sahib) में संत रविदास जी की वाणी को विशेष सम्मान के साथ शामिल किया गया है। इसमें उनके कुल 40 शब्द (Hymns) और श्लोक दर्ज हैं, जो विभिन्न रागों (Musical Measures) में गाए जाते हैं। पाँचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी ने जब इस ग्रंथ का संपादन किया, तब उन्होंने संत रविदास जी की आध्यात्मिक ऊँचाई (Spiritual Height) को देखते हुए उनकी रचनाओं को 'धुर की बणी' (Divine Word) का दर्जा दिया।

इन पदों को शामिल करने का मुख्य कारण उनकी वाणी में मौजूद सार्वभौमिक सत्य (Universal Truth) और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम था। गुरु ग्रंथ साहिब एक समावेशी ग्रंथ (Inclusive Scripture) है जो केवल एक धर्म या जाति की बात नहीं करता, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण (Welfare of Humanity) का मार्ग प्रशस्त करता है। संत रविदास जी के शब्द आज भी करोड़ों सिखों और अन्य अनुयायियों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत हैं। उनकी वाणी में विनय, नम्रता और अहंकार का पूर्ण त्याग झलकता है।

धार्मिक दृष्टि से इन पदों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये सामाजिक समरसता (Social Harmony) का जीवित प्रमाण हैं। गुरु ग्रंथ साहिब में संत रविदास जी की वाणी का होना यह दर्शाता है कि आध्यात्मिकता के शिखर पर पहुँचने के बाद कोई भेदभाव नहीं रह जाता। उनके शब्द (Shabads) ईश्वर की निराकार सत्ता और उसकी सर्वव्यापकता (Omnipresence) का बोध कराते हैं। यह भाषाई और सांस्कृतिक एकता (Cultural Unity) का एक अनूठा संगम है।

जब भी किसी गुरुद्वारे में 'राही रावे गुरु सतिगुरु' जैसे पदों का गायन (Chanting) होता है, तो पूरा वातावरण दिव्यता से भर जाता है। संत जी ने अपनी रचनाओं में 'राम' और 'अल्लाह' के बीच के भेद को मिटाकर एक ही सत्ता की उपासना पर जोर दिया। उनकी वाणी को सुरक्षित रखने में सिख गुरुओं का योगदान अतुलनीय है। यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि सत्य के खोजी किसी भी कुल या क्षेत्र (Region) के हों, उनका सम्मान सर्वोपरि है।

संत रविदास जन्म दिवस (Sant Ravidas Birth Anniversary) पर गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ (Continuous Recitation) किया जाता है। यह परंपरा भक्तों को याद दिलाती है कि गुरु जी के विचार अमर हैं और वे किसी एक संप्रदाय की संपत्ति नहीं बल्कि पूरी मानवता की विरासत (Heritage) हैं। उनकी वाणी का प्रत्येक अक्षर समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर (Darkness to Light) ले जाने का संकल्प है। गुरु ग्रंथ साहिब में उनकी उपस्थिति उनके महान व्यक्तित्व का वैश्विक प्रमाण (Global Evidence) है।

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सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' (Guru Granth Sahib) में संत रविदास जी की वाणी को विशेष सम्मान के साथ शामिल किया गया है। इसमें उनके कुल 40 शब्द (Hymns) और श्लोक दर्ज हैं, जो विभिन्न रागों (Musical Measures) में गाए जाते हैं। पाँचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी ने जब इस ग्रंथ का संपादन किया, तब उन्होंने संत रविदास जी की आध्यात्मिक ऊँचाई (Spiritual Height) को देखते हुए उनकी रचनाओं को 'धुर की बणी' (Divine Word) का दर्जा दिया।

इन पदों को शामिल करने का मुख्य कारण उनकी वाणी में मौजूद सार्वभौमिक सत्य (Universal Truth) और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम था। गुरु ग्रंथ साहिब एक समावेशी ग्रंथ (Inclusive Scripture) है जो केवल एक धर्म या जाति की बात नहीं करता, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण (Welfare of Humanity) का मार्ग प्रशस्त करता है। संत रविदास जी के शब्द आज भी करोड़ों सिखों और अन्य अनुयायियों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत हैं। उनकी वाणी में विनय, नम्रता और अहंकार का पूर्ण त्याग झलकता है।

धार्मिक दृष्टि से इन पदों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये सामाजिक समरसता (Social Harmony) का जीवित प्रमाण हैं। गुरु ग्रंथ साहिब में संत रविदास जी की वाणी का होना यह दर्शाता है कि आध्यात्मिकता के शिखर पर पहुँचने के बाद कोई भेदभाव नहीं रह जाता। उनके शब्द (Shabads) ईश्वर की निराकार सत्ता और उसकी सर्वव्यापकता (Omnipresence) का बोध कराते हैं। यह भाषाई और सांस्कृतिक एकता (Cultural Unity) का एक अनूठा संगम है।

जब भी किसी गुरुद्वारे में 'राही रावे गुरु सतिगुरु' जैसे पदों का गायन (Chanting) होता है, तो पूरा वातावरण दिव्यता से भर जाता है। संत जी ने अपनी रचनाओं में 'राम' और 'अल्लाह' के बीच के भेद को मिटाकर एक ही सत्ता की उपासना पर जोर दिया। उनकी वाणी को सुरक्षित रखने में सिख गुरुओं का योगदान अतुलनीय है। यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि सत्य के खोजी किसी भी कुल या क्षेत्र (Region) के हों, उनका सम्मान सर्वोपरि है।

संत रविदास जन्म दिवस (Sant Ravidas Birth Anniversary) पर गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ (Continuous Recitation) किया जाता है। यह परंपरा भक्तों को याद दिलाती है कि गुरु जी के विचार अमर हैं और वे किसी एक संप्रदाय की संपत्ति नहीं बल्कि पूरी मानवता की विरासत (Heritage) हैं। उनकी वाणी का प्रत्येक अक्षर समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर (Darkness to Light) ले जाने का संकल्प है। गुरु ग्रंथ साहिब में उनकी उपस्थिति उनके महान व्यक्तित्व का वैश्विक प्रमाण (Global Evidence) है।
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